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Jalandhar News: आईईएलटीएस सेंटर वीरान, इमिग्रेशन कंपनियों पर ताले

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-कनाडा के शिक्षण संस्थानों में 80 फीसदी वीजा रिजेक्ट होने लगे
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-पहले 11,000 पंजीकृत आईईएलटीएस केंद्र थे, अब 3,000 बचे
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सुरिंदर पाल
जालंधर। पंजाब के लोगों का अपने भाई, बहन और रिश्तेदारों की तरह कनाडा, यूके, आस्ट्रेलिया पहुंचने का सपना धूमिल होने लगा है। वजह है अस्वीकृत होने वाले वीजा की बढ़ती संख्या। ऐसे में पंजाब की सबसे मजबूत विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री वीरान दिखाई देने लगी है। जहां रौनक होती थी वहां सन्नाटा पसरता जा रहा है। आईलेट्स सेंटर वीरान पड़े हैं और स्टाफ निकाल दिया गया है।
पिछले साल की शुरुआत में कनाडा के उदार आव्रजन कानूनों में बदलाव शुरू हो गए। देश ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों, आप्रवासियों और आगंतुकों के स्वागत के तरीके में बड़े बदलावों की घोषणा की। देश ने जीवनसाथी वीजा पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अब केवल मास्टर और पीएचडी छात्र अपने जीवनसाथी को साथ ला सकते हैं। कनाडा के शिक्षा संस्थानों में 80 फीसदी वीजा रिजेक्ट होने लगे हैं। तकनीकी कौशल के बिना इच्छुक अप्रवासियों के लिए नौकरी पाना, वर्क परमिट प्राप्त करना और स्थायी निवासी बनना बहुत मुश्किल हो रहा है। लिहाजा जहां एक साल पहले, पंजाब में लगभग 11,000 पंजीकृत इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम (आईईएलटीएस) केंद्र थे। अब 3,000 ही बचे हैं। उनमें भी अधिकांश पर ताला लटक रहा है।
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बेंचमार्क के एमडी परमप्रीत सिंह का कहना है कि पंजाब में 95 फीसदी आईईएलटीएस सेंटर बंद हो गए हैं। कुछ अगर चल रहे हैं तो वहां पर स्टूडेंट्स की संख्या नाममात्र है। अमेरिका ने तो स्टडी वीजा पर बिल्कुल आवेदन बंद कर दिए हैं। वीजा आवेदन की तिथि नहीं मिल रही है। जालंधर में बस स्टैंड के निकट एक बड़ा आईईएलटीएस सेंटर जहां दोआबा की भारी भीड़ दाखिला लेने के लिए उत्सुक रहती थी, वहां पर दो कमरों में ही सेंटर रह गया है। जहां 20 शिक्षक थे, वहां पर दो रह गए हैं।
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लाखों युवाओं की नौकरी गई
न्यू इमेज की एमडी पूजा सिंह का कहना है कि विदेशी एजुकेशन इंडस्ट्री में लाखों युवाओं की नौकरी चल गई है। विदेश में स्टडी के लिए नियम इतने सख्त हैं और कई देशों ने तो दरवाजे बंद कर दिए हैं जिसका व्यापक असर पंजाब पर हुआ है। पंजाब में 90 फीसदी स्टडी वीजा का ग्राफ गिर गया है। अधिकांश विदेशी एजुकेशन कार्यालय बंद हो गए हैं। कनाडा के कॉलेजों में ही दाखिला ही नहीं मिल रहा और अगर मिलता है तो वीजा रिजेक्शन ही 80 फीसदी है। यूके व ऑस्ट्रेलिया ने भी वीजा पर सख्ती कर 10 फीसदी तक गिरा दिया है। आईईएलटीएस ट्रेनर चैरी बहल ने प्रोफेशन बदल दिया है। वह पहले इमिग्रेशन की काउंसलर व आईलेट्स ट्रेनर थी। अब वह वकालत कर रही हैं और जालंधर सेशन कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी है। चैरी बहल का कहना है कि इंडस्ट्री का हाल बेहाल हो गया है। वकालत तो पहले ही की हुई थी इसलिए अब प्रैक्टिस शुरू कर दी है।
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