पांच सितंबर को बदला था प्रभारी
इसी स्थिति को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान ने तत्कालीन पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को संगठन की स्थिति का जायजा लेने की जिम्मेदारी दी थी। बघेल ने पंजाब के नेताओं से व्यापक स्तर पर बातचीत की और विभिन्न गुटों के नेताओं से फीडबैक लिया। हालांकि इसके बावजूद वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद पर बरकरार रखने का फैसला हुआ। इसके बाद भी संगठन के भीतर असंतोष और गुटबाजी की चर्चाएं थमी नहीं। पार्टी के एक धड़े की ओर से बघेल की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए गए और आखिरकार 5 सितंबर को कांग्रेस ने भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी नियुक्त कर दिया।
व्यापक फीडबैक लिया
पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद संगठन की स्थिति को समझने के लिए नए सिरे से व्यापक फीडबैक प्रक्रिया शुरू हुई। पायलट ने वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ जिला स्तर के पदाधिकारियों और संगठन से जुड़े दूसरे नेताओं से भी बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान बड़ी संख्या में बैठकें और व्यक्तिगत बातचीत हुईं। पार्टी के भीतर चल रही खींचतान, संगठन की स्थिति और 2027 के चुनाव को लेकर नेताओं की राय जुटाई गई। इसी बीच वड़िंग और चन्नी एक मंच पर दिखाई दिए और दोनों खेमों की ओर से एकजुटता का संदेश देने की कोशिश भी हुई, लेकिन अंदरूनी मतभेदों को पूरी तरह खत्म करने में यह कवायद सफल नहीं हो सकी।
हाईकमान को साैंपी रिपोर्ट
अब पार्टी सूत्रों का दावा है कि सचिन पायलट ने पंजाब कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट हाईकमान को सौंप दी है। इसी रिपोर्ट के बाद प्रदेश संगठन में बदलाव को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं। हाईकमान के स्तर पर नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर मंथन चल रहा है और विजय इंदर सिंगला का नाम प्रमुख दावेदार के तौर पर चर्चा में है। उनके अलावा चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा, परगट सिंह, गुरजीत सिंह औजला और सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी संभावित विकल्पों में बताए जा रहे हैं।
सिंगला के नाम के साथ कांग्रेस के लिए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। यदि हाईकमान उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देता है तो कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए बिना सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ सकती है। इससे पार्टी के वरिष्ठ सिख नेताओं के बीच मुख्यमंत्री पद की संभावनाएं खुली रहने की गुंजाइश बनी रहेगी, जबकि प्रदेश संगठन की कमान एक अलग सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेता के हाथ में होगी। कांग्रेस की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि वह पंजाब में चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ सकती है और चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने से बच सकती है।
ऐसे में अगले 48 घंटे पंजाब कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि हाईकमान वडिंग को हटाने का फैसला करता है तो यह पिछले कुछ महीनों में पंजाब कांग्रेस में तीसरा बड़ा संगठनात्मक बदलाव होगा पहले प्रदेश नेतृत्व को लेकर मंथन, फिर पंजाब प्रभारी के तौर पर भूपेश बघेल की विदाई और सचिन पायलट की नियुक्ति तथा अब प्रदेश अध्यक्ष बदलने की संभावित कवायद। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग खेमों को एक मंच पर लाकर एक प्रभावी संगठन खड़ा करने की है।