सिख विरोधी दंगों को हुए 29 साल के बाद भी इंसाफ न मिलने से खफा कई सिख जत्थेबंदियों ने जालंधर में शुक्रवार को रोष मार्च निकाला। रोष मार्च का आरंभ गुरुद्वारा माडल टाउन से अरदास के साथ किया गया।
इस मार्च में पूर्व डीजीपी जेल शशिकांत भी हाजिर हुए। इस मार्च में दल खालसा के प्रधान हरचरण सिंह, पंच प्रधान अकाली दल के कार्यकारी प्रधान हरपाल सिंह चीमा, दल खालसा के राजनीतिक मामलों के सचिव कंवरपाल सिंह, आल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्व प्रधान परमजीत सिंह, प्रधान मनजीत सिंह, बाबा अजीत सिंह के अतिरिक्त हजारों की संख्या में विभिन्न सिख जत्थेबंदियों के नेता हाजिर हुए।
इस मौके पर पूर्व डीजीपी शशिकांत ने कहा कि 29 साल बीतने के बावजूद इंसाफ न मिलना गुलामी का संकेत है। उनका कहना है कि भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 1984 की घटना अति दुखद रही है।
गुरुद्वारा माडल टाउन से यह मार्च 2 बजे आरंभ हुआ। इसके बाद मार्च गुरु नानक मिशन चौक पहुंचा जहां से स्काईलार्क चौक से होते हुए सर्किट हाउस, होटल शेखों ग्रैंड के आगे से होते हुए बीएमसी चौक पहुंचा। इसके बाद मार्च गुरु नानक मिशन के रास्ते हुए वापस गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा माडल टाउन में समाप्त हुआ। रोष मार्च 3.30 बजे समाप्त हुआ।
युवक जीपों तथा मोटरसाइकिल पर भी सवार थे। इस दौरान गुरदेव सिंह पूर्व आईएएस, नवकिरण सिंह एडवोकेट, अमर सिंह चाहल एडवोकेट, मनधीर सिंह नवांशहर, सरबजी सिंह घुम्मन आगु दल खालसा, हरदीप सिंह बठिंडा, परमजीत सिंह गाजी पूर्व प्रधान फेडरेशन, जसपाल सिंह मंजपुर, अमरीक सिंह, सुखचैन सिंह पातला (मानसा) तथा अन्य सिख जत्थेबंदियों के नेता हाजिर हुए।
छावनी में तबदील रहा रूट
रोष मार्च का रूट पूरी तरह से पुलिस छावनी में तबदील रहा। मार्च के दौरान पब्लिक को सड़क पर चलने में काफी परेशानी उठानी पड़ी। मार्च के दौरान कोई विवाद न हो इस कारण पुलिस कमिश्नर राम सिंह भी रूट पर नजर रखे रहे। उन्होंने पूरे रूट के दौरान दो बार चेकिंग की। प्रत्येक चौक में भारी पुलिस फोर्स तैनात थी। पुलिस को ग्रामीण क्षेत्रों के साथ दूसरे जिलों से भी फोर्स मंगवानी पड़ी थी। पुलिस कमिश्नर राम सिंह ने कहा कि मार्च शांतिपूर्वक रहा है।