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Punjab: 'डेरों को प्रमोट करना चिट्टा बेचने से भी खतरनाक', ऐसा क्यों बोले दिल लै गई कुड़ी गुजरात दी के गायक

Wed, 11 Mar 2026 02:55 PM IST
Ankesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर

सार

पंजाब में धार्मिक डेरों पर होने वाले आयोजनों को लेकर पंजाबी सिंगर जसबीर जस्सी ने बड़ा बयान दिया है। जस्सी ने कहा कि डेरों में लोगों का माइंडवॉश किया जाता है और ऐसे स्थानों को प्रमोट करना समाज के लिए खतरनाक है।
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सिंगर जसबीर जस्सी - फोटो : इंस्टाग्राम@jassijasbir
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विस्तार
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दिल लै गई कुड़ी गुजरात दी से मशहूर पंजाबी गायक जसबीर जस्सी ने डेरों में होने वाले आयोजनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह कब्रों या मजारों से जुड़े स्थानों पर गाना नहीं गाते, चाहे इसके लिए उन्हें करोड़ों रुपये की पेशकश ही क्यों न की जाए।

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जस्सी ने कहा कि कई डेरों में लोगों का माइंडवॉश किया जाता है और ऐसे स्थानों को प्रमोट करना समाज के लिए खतरनाक है। उनका कहना है कि अगर कलाकार इन आयोजनों में जाकर परफॉर्म करते हैं तो वहां ज्यादा लोग जुड़ते हैं और इसका असर लोगों की सोच पर पड़ता है।

जस्सी के मुताबिक उन्हें लुधियाना के एक बाबा ने अपने डेरे में लगने वाले मेले में गाने के लिए 32 से 35 लाख रुपये की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि उनसे पहले भी कई सिंगर वहां प्रस्तुति दे चुके थे और बाद में भी कार्यक्रम होते रहे, लेकिन उन्होंने अपने उसूलों के चलते मना कर दिया।

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कब्रों वाली जगहों पर नहीं गाता- जस्सी
सिंगर ने बताया कि कार्यक्रम के बाद बाबा की ओर से उन्हें फोन कर कहा गया कि अगर वह नहीं आए तो उनसे भी बेहतर सिंगर बुलाकर कार्यक्रम करवा लिया गया। जस्सी ने कहा कि उनका सिद्धांत साफ है कि वह कब्रों वाली जगहों पर नहीं गाते, इसलिए उन्होंने यह ऑफर ठुकरा दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिंदगी में पैसा ही सब कुछ नहीं होता, कुछ उसूल भी होते हैं और जिस काम से समाज पर नकारात्मक असर पड़ता हो, उससे दूरी बनाकर रखना जरूरी है।

पैसों के लिए गलत काम नहीं करूंगा
जस्सी का कहना है कि हर व्यक्ति की समाज के प्रति जिम्मेदारी होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति बड़ी रकम देकर गलत काम करने को कहे तो क्या वह केवल पैसों के लिए उसे कर देना चाहिए। अगर कोई एक करोड़ रुपये देकर ड्रग या चिट्टा बेचने के लिए कहे तो क्या वह ऐसा करने लग जाएंगे। ऐसा नहीं होता, क्योंकि हर व्यक्ति की सामाजिक जिम्मेदारी भी होती है।

डेरों में किया जाता है लोगों का मांइडवॉश
उन्होंने आरोप लगाया कि कई डेरों में लोगों की सोच को प्रभावित किया जाता है और वहां आने वाले लोगों का माइंडवॉश किया जाता है। उनके मुताबिक अगर कलाकार ऐसे आयोजनों में जाकर परफॉर्म करते हैं तो इससे उन स्थानों को और बढ़ावा मिलता है और ज्यादा लोग उससे जुड़ते हैं, जो कि समाज के लिए खतरनाक है। इसी कारण वह ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखते हैं।

मना करने के बाद दोबारा आया फोन
जस्सी ने यह भी बताया कि जब उन्होंने लुधियाना के बाबा के डेरे में गाने से मना किया तो वहां से जुड़े एक व्यक्ति ने उन्हें बार-बार फोन कर कहा कि अगर वह कार्यक्रम में आ जाएंगे तो उन पर “बहुत कृपा” होगी और वह जहां हैं उससे भी ऊपर पहुंच जाएंगे। जस्सी के अनुसार उन्होंने उस व्यक्ति से साफ कह दिया कि रहने दो, लेकिन वह बार-बार यही बात दोहराता रहा। आखिरकार उन्होंने उसे जवाब दिया कि उन पर पहले से ही श्री गुरु ग्रंथ साहब की कृपा है और उन्हें किसी बाबा की कृपा की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि लोग बहुत भोले-भाले होते हैं और उन्हें सच्ची आस्था से भटकाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

अकाल तख्त में मांगी थी माफी
जस्सी अपने बयानों को लेकर पहले भी चर्चा में रहे हैं। हाल ही में एक धार्मिक कार्यक्रम में शबद कीर्तन गाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था और मामला अकाल तख्त तक पहुंच गया था। उस समय कुछ सिख धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी कि कीर्तन के लिए गुरमत मर्यादा का पालन जरूरी है। बाद में जस्सी ने स्पष्ट किया कि सिख धर्म और गुरु साहिबान के प्रति उनकी आस्था अटूट है और अगर उनकी किसी बात से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं और अकाल तख्त के आदेशों का सम्मान करते हैं।
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हनी सिंह की टिप्पणी पर जस्सी ने उठाया था सवाल
इसके अलावा दिल्ली में एक लाइव शो के दौरान गायक हनी सिंह की कथित अश्लील टिप्पणी पर भी जस्सी ने सवाल उठाए थे और कहा था कि इस तरह की भाषा पर रोक लगनी चाहिए। वहीं पंजाबी फिल्म सरदार जी 3 में पाकिस्तानी कलाकार को कास्ट करने के समर्थन में दिए गए उनके बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था और दिल्ली के पार्लियामेंट थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना जरूरी
जस्सी का कहना है कि कलाकार होने के साथ-साथ समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। उनके अनुसार पैसा कमाना ही कलाकार का एकमात्र उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि उनके काम का समाज पर क्या असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करेंगे और ऐसे आयोजनों से दूरी बनाए रखेंगे जो समाज को गलत दिशा में ले जा सकते हैं।
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