गांव नवा किला के 27 वर्षीय नौजवान श्याम सिंह शेरा ने अपाहिज होने के बावजूद बॉडी बिल्डिंग में विश्व चैंपियन बनने का खिताब जीता है लेकिन सरकार की बेरूखी के कारण वह अब तक बेरोजगार है। अपनी आजीविका के लिए सरकारी नौकरी अथवा उसने एक बार फिर राज्य सरकार सेे मदद की गुहार लगाई है।
जानकारी के अनुसार साधारण ग्रामीण परिवार से संबंधित श्याम सिंह शेरा ने वर्ष 2006 से बॉडी बिल्डिंग मुकाबलों में भाग लेने शुरू किया था और उसके बाद अपनी मेहनत व लगन के चलते कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
अब तक वह सात बार मिस्टर पंजाब, तीन बार मिस्टर नार्थ इंडिया और छह बार मिस्टर इंडिया रह चुका है। नवंबर 2012 के दौरान स्पेन में आयोजित विश्व स्तरीय बॉडी बिल्डिंग चैंपियनशिप में पहला स्थान हासिल करके भारत का नाम भी रोशन कर चुका है।
शेरा ने बताया कि रोजगार के नाम पर उसने गांव में एक जिम खोला हुआ है जिसके माध्यम से वह क्षेत्र के नौजवानों को नशे से दूर रहने व खेलों के हुनर सीखा रहा है। बॉडी बिल्डिंग में बेहतरीन प्राप्तियों के चलते दर्जनों संस्थाएं उसे सम्मानित कर चुकी है लेकिन यह सब उसका पेट भरने में सहायक नहीं है।
शेरा का दावा है कि जिम चलाने से उसे मात्र सात हजार रूपये प्रतिमाह की आमदनी होती है जबकि बॉडी बिल्डिंग की किसी चैंपियनशिप की तैयारी करने के समय उसे एक हजार रुपये की रोजाना खुराक खाने की जरूरत पड़ती है। शेरा ने बताया कि वह कई बार राज्य सरकार से आर्थिक मदद या सरकारी नौकरी देने की गुहार लगा चुका है लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही।
एक बार वह मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से भी मिलकर मदद की मांग कर चुका है। शेरा ने कहा कि यदि उसके प्रति सरकार की बेरूखी इसी तरह कायम रही तो आने वाले दिनों में उसे खेल से किनारा करने को मजबूर होना पड़ेगा। यदि सरकार कबड्डी को प्रोत्साहित करने में करोड़ों रुपये खर्च कर सकती है तो अन्य खेलों की तरफ भी बराबर ध्यान दिया जाना चाहिए।