पंजाब सरकार की तरफ से नाजायज कालोनियों पर निकेल डालने के लिए आरंभ की गई स्कीम मंगलवार को खत्म हो चुकी है।
स्कीम खत्म होने के दूसरे दिन भी लोग नगर निगम में पैसे जमा करवाने पहुंचे लेकिन जहां कर्मचारियों ने उनसे फीस नहीं ली वहीं अधिकारी तो दफ्तर ही आए नहीं। बेशक लोगों से निगम के अधिकारियों ने फीस नहीं ली लेकिन अधिकारियों व नेताओं की सिफारिश पर चोर दरवाजे से फीस जमा होती रही।
जिन लोगों ने पहले अपनी फाइलें जमा करवा रखी थीं वे अपनी फाइलें ढूंढते रहे। फाइलें ढूंढने का भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ क्योंकि कर्मचारियों ने सीधे रूप में उनसे फीस लेने से इंकार कर दिया। कर्मचारियों का कहना था कि अब वे 10 फीसदी जुर्माने के साथ ही फीस जमा करवा पाएंगे।
उधर, पंजाब सरकार ने 1995 से पहले बनी कालोनियों को जो छूट दी थी वे भी लोगों को नहीं मिल पाई। जिन लोगों ने पुरानी रजिस्ट्री साथ लगाकर आवेदन कर रखा था, उनसे भी निगम ने पूरी ही फीस ली।
अंतिम दिन तीन सौ आवेदन पहुंचे : मेयर
मेयर सुनील ज्योति का कहना है कि नियमों के मुताबिक 1995 का लाभ उन लोगों को दिया गया है, जिनकी नई रजिस्ट्री व पुरानी रजिस्ट्री में जगह एक बराबर है। उन लोगों को यह लाभ नहीं मिला है, जिन्होंने अपने मकान से आधा हिस्सा दूसरे को बेच दिया है। निगम के पास 5 नवंबर तक करीब 19000 फाइलें आई थीं। अंतिम दिन ही करीब 300 आवेदन पहुंचे हैं।
इनमें करीब 150 कालोनियों के लिए आवेदन आए हैं। अभी तक 6200 लोगों को एनओसी भी जारी कर दी गई है। अब आवेदन लेने का काम बंद हो चुका है तो आगामी कुछ ही दिनों में सभी लोगों को एनओसी जारी कर दी जाएंगी। इन आवेदनों से निगम को करीब 15 करोड़ रुपए का रवेन्यू मिला है। ऐसे ही जेडीए के पास 9161 लोगों ने एनओसी के लिए आवेदन किया है। अब तक जेडीए ने 1608 लोगों को एनओसी जारी की है। इन आवेदनों से जेडीए को 17.73 करोड़ रुपये का रवेन्यू मिला है।