नगर निगम की सफाई यूनियन के प्रधान चंदन ग्रेवाल ने कहा कि हम सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट के खिलाफ नहीं हैं, हमारी जंग ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ है।
चुनावी घोषणापत्र में सरकार ने वादा किया था कि ठेकेदारी प्रथा को खत्म किया जाएगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट भी एक ठेकेदारी प्रथा है। नगर निगम के तहत सफाई व्यवस्था व कूड़ा उठाने के लिए करीब पांच हजार मुलाजिम काम कर रहे हैं। एक मुलाजिम औसतन रोजाना 200 लोगों का कूड़ा लिफ्ट करता है।
सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट की कंपनी सिर्फ 800 मुलाजिमों से काम चलाएगी, बाकी 4200 लोग कहां जाएंगे। चंदन ने कहा कि कूड़े से खाद बनाने का प्रोजेक्ट सिर्फ 110 करोड़ की लागत का है। जालंधर नगर निगम 230 करोड़ स्पोर्ट्स हब पर खर्च करने जा रहा है तो यह कूड़े से खाद का प्रोजेक्ट जिंदल कंपनी को क्यों दिया गया? सरकार यह खुद भी चला सकती है।
‘सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट सरकार खुद चलाए’
नगर निगम के मुलाजिम कंपनी के अधीन चले जाएंगे। इसके बाद शहरवासियों पर अलग से नया टैक्स लग जाएगा, लोगों को कूड़ा टैक्स अदा करना होगा। चंदन ने कहा कि उनकी मांग तो काफी सीधी है, सॉलिड वेस्ट प्रोजेक्ट को सरकार खुद चलाए। इस प्रोजेक्ट के तहत जितनी भी भर्ती हो वह वाल्मीकि समाज से हो। इसमें हमें क्या परेशानी है?