पठानकोट के एनएचपीसी रेस्ट हाऊस में जानकारी देते आयोग के सदस्य।
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पठानकोट। गांव हैबत पिंडी में जमीन का विवाद अब अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच चुका है। आयोग के 3 सदस्य शुक्रवार को मामले की जांच पठानकोट पहुंचे। पीड़ित ने दिसंबर में आयोग को शिकायत दी थी. जिसमें उसने रेवेन्यू विभाग पर मिलीभुगत और पुलिस अधिकारियों पर मारपीट के आरोप लगाए थे।
मामले की जांच के लिए आयोग के सदस्य ज्ञान चंद, तरसेम सिंह स्यालका और प्रभ दियाल पठानकोट पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गांव हैबत पिंडी जाकर दोनों पक्षों के अलावा रेवेन्यू विभाग और पुलिस अधिकारियों से भी उनका पक्ष जाना। उन्होंने एसपी (डी) प्रभजोत सिंह विर्क को मामले की जांच कर 2 मार्च को रिपोर्ट पेश करने कोकहा है। आयोग सदस्य ज्ञान चंद ने बताया कि शिकायतकर्ता सुखबीर कुमार ने शिकायत दी थी कि उसने अपनी 39 कनाल 15 मरले जमीन किसी व्यक्ति को खेती करने के लिए दी थी। उक्त व्यक्ति ने उसकी जमीन किसी और को ठेके पर दे दी। तीसरे व्यक्ति ने तहसीलदार, पटवार और गिरदौर से मिलीभगत कर जमीन की अपने नाम गिरदावरी करवा ली।
जब उसे पता चला तो उसने एसएसपी को शिकायत दी। डीएसपी रूरल को जांच सौंपी गई थी। डीएसपी ने उन्हें और दूसरे पक्ष को अपने दफ्तर में बुलाया था। उससे 2 दिन पहले ही तारागढ़ पुलिस उसके घर पहुंच गई। पुलिस ने उसके साथ मारपीट की और गाड़ी में बैठाकर थाने ले आई। आरोपी भी थाने मे थे। पुलिस ने उसे जमकर पीटा और जातिसूचक गालियां दीं।
इस दौरान मारपीट कर उससे स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवा लिए। वहां पहुंची पत्नी शर्मिला देवी से भी पुलिस मारपीट की। इसके बाद उन्होंने आयोग के समक्ष इंसाफ की गुहार लगाई। आयोग सदस्य ज्ञान चंद ने बताया कि एसपी विर्क को 2 मार्च तक पूरे मामले की पड़ताल कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। रिपोर्ट में आरोपी पाए गए पक्ष के अलावा रेवेन्यू विभाग के अधिकारियों, पुलिस कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।