राज्य के सात निजी डेंटल कॉलेजों में एमडीएस की 41 सीटें भरने को लेकर
कॉलेज प्रबंधकों, डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (डीआरएमई) और
बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के बीच विवाद खड़ा हो गया है। डेंटल कॉलेजों
के इन खाली सीटों पर अपने स्तर पर दाखिले शुरू करने की प्रक्रिया पर
डीआरएमई और बाबा फरीद विवि ने सख्त नोटिस लिया और डेंटल कॉलेजों को यह
प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए हैं।
राज्य भर के 15 निजी
और दो सरकारी डेंटल कॉलेजों में एमडीएस की कुल 123 सीटें हैं। एक माह के
दौरान बाबा फरीद विवि में तीन बार आयोजित हो चुकी काउंसिलिंग में सरकारी
कॉलेजों की सभी 18 सीटें भरी जा चुकी हैं जबकि निजी कॉलेजों की 41 सीटें
खाली हैं। हालांकि विवि ने इन सीटों के लिए 10 जून को एक्सटेंशन ऑफ थर्ड
काउंसिलिंग रखी हुई है लेकिन इसी बीच निजी कॉलेजों में भी अपने स्तर पर
आवेदन मांग कर नया विवाद खड़ा कर लिया है।
विवि के रजिस्ट्रार डॉ. जीएस सिद्धू के अनुसार निजी कॉलेजों की अपने स्तर पर दाखिले की प्रक्रिया गलत है और नियमों के अवहेलना है।
इन
कॉलेजों की काउंसिलिंग में भाग लेने वाले स्टूडेंट्स खुद जिम्मेवार होंगे।
उन्होंने इन सीटों के लिए 10 जून को काउंसिलिंग रखी हुई है। डीआरएमई मनजीत
कौर मोही ने भी स्पष्ट किया है कि इन सीटों के लिए बाबा फरीद विवि को ही
काउंसिलिंग का अधिकार है और कोई भी कॉलेज अपने स्तर पर सीटें नहीं भर सकता।
साथ ही एआईपीजीडीईई -2015 में अपीयर नहीं होने वाले
स्टूडेंट्स भी एमडीएस के लिए आवेदन नहीं कर सकते जबकि निजी कॉलेजों में ऐसे
स्टूडेंट्स को काउंसिलिंग के लिए आमंत्रित कर लिया है। इस मामले में खाली
सीटों वाले सात कॉलेजों में शामिल मुक्तसर के देश भगत डेंटल कॉलेज अस्पताल
के अधीक्षक महिंदर सिंह का दावा है कि तीन बार काउंसिलिंग के उपरांत खाली
रहने वाले सीटों पर कॉलेजों को अपने स्तर पर दाखिले का अधिकार है। इसके
अलावा एक जून को ही मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग के सचिव ने नोटिफिकेशन जारी
करके स्पष्ट किया था कि खाली रहने वाले सीटों पर बीडीएस कोर्स के परफॉरमेंस
के आधार पर स्टूडेंट्स को दाखिला दिया जा सकता है।