जालंधर। रविवार को शहर के एक अस्पताल में मरीज की मौत के बाद उसका शव न दिए जाने का आरोप लगा मृतका के परिजनों ने हंगामा कर दिया। इस बात को लेकर मृतक के परिजनों ने नकोदर रोड स्थित मान मेडिसिटी अस्पताल में जमकर हंगामा किया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव करते हुए मामला शांत करवा मृतका के परिजनों को शव दिलाया। मृतका कारगिल में शहीद हुए फौजी की पत्नी थीं और कुछ दिन पहले वह कोरोना पॉजिटिव पाई गई थीं। उधर अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम यानि कि ईसीएचएस का मरीज होने की वजह से सरकारी कार्रवाई पूरी करने में समय लग गया था। तमाम कार्रवाई के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
मुकेरियां के प्रदीप कुमार ने बताया कि करीब एक माह पहले उनकी मां राजकुमारी की तबीयत खराब होने के बाद उन्हें मान मेडिसिटी अस्पताल में दाखिल करवाया था। टेस्ट में उनकी कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट आई थी। उन्हें बीपी व दस्त की शिकायत थी। इसके बावजूद अस्पताल में उन्हें कोरोना वार्ड में रखा गया। उन्हें आशंका है कि कोरोना वार्ड में रखने के बाद उन्हें कोरोना हुआ और रविवार को सुबह उनकी मां की मौत हो गई। इतना ही नहीं मां की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने शव देने में आनाकानी की। अंत में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामले को शांत किया।
अपना पक्ष रखते हुए अस्पताल के डॉ. जेएस मान ने कहा कि शनिवार को देर रात कोरोना मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इसके बाद उन्हें तुरंत वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि ईसीएचएस का रेफर मरीज होने की वजह से उन्हें स्वास्थ्य विभाग को सूचित करना पड़ता है। अस्पताल ने कागजी कार्रवाई कर सेहत विभाग की नीतियों के अनुसार ही शव मृतका के घरवालों को सौंपा है। इस वजह से थोड़ा समय लग गया। शव देने में आनाकानी के आरोप निराधार हैं।