-पंथक वोट का एक हिस्सा दोबारा लाने का प्रयास कर रहा था अकाली दल
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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
जालंधर/अमृतसर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का जालंधर लोकसभा उपचुनाव को लेकर एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी की ओर से वोट मांगने पर सवाल उठाना शिअद को घेरने की तैयारी का हिस्सा है। रविवार को उन्होंने अकाली दल का नाम लिए बिना पूछा था कि एक ऐसी राजनीतिक पार्टी जिस पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के आरोप लगते हैं। उस पार्टी के पक्ष में एसजीपीसी के प्रधान द्वारा वोट मांगना कितना जायज है ? क्या यह लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ नहीं है? मान के ट्वीट से जालंधर उपचुनाव में उन इलाकों में खासा असर पड़ सकता है, जहां पंथक व कट्टर सिख वोट बैंक है। एसजीपीसी की ओर से अमृतपाल सिंह के मामले में लिए गए स्टैंड और असम में सिख बंदियों के लिए पैरवी से अकाली दल को उम्मीद है कि उनसे नाराज पंथक वोट वापस आ सकता है।
लिहाजा, एसजीपीसी की तरफ से पिछले कुछ समय में काफी ऐसे कदम उठाए गए हैं, जिससे काफी सिखों के भीतर एसजीपीसी के लिए सकारात्मक सोच पैदा हुई है। अब मान ने ट्वीट कर एसजीपीसी व अकाली दल को कठघरे में खड़ा कर दिया है। जालंधर उपचुनाव में काफी ऐसे इलाके हैं, जहां पर पंथक व कट्टर सिख वोटर हैं। शाहकोट लोहियां, मल्लसियां के अलावा करतारपुर में भारी संख्या में वोटर हैं, जो पंथक गिने जाते हैं। अकाली दल द्वारा इन वोटों को लेकर सोची समझी रणनीति तैयार की जा रही थी, जिसको सीएम की ट्वीट से ब्रेक लगने की संभावना है।
धामी के जवाब से बढ़ सकता है मामला
एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने भी मुख्यमंत्री के ट्वीट का जवाब दिया था। उन्होंने कहा था मुख्यमंत्री जी, आपको श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है। हाल ही में मोरिंडा की बेअदबी की घटना के दोष से आप खुद को कैसे मुक्त कर सकते हैं? आपकी सरकार के दौरान और भी कई बेअदबी की घटनाएं हुईं। हां, ये घटनाएं हर सिख को आहत करती हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए। लेकिन इस पर राजनीति करना भी अपराध है। बात यह है कि अपनी पार्टी के लिए प्रचार करना सभी का संवैधानिक अधिकार है, जिसका इस्तेमाल दिल्ली के मुख्यमंत्री भी यहां आकर कर रहे हैं। आपको पंजाब की उन चिंताओं, अधिकारों और हितों के बारे में सोचना चाहिए, जिनसे आप मुंह मोड़ रहे हैं। धामी के जवाब के बाद मामला बढ़ सकता है। हालांकि अभी तक आम आदमी पार्टी के किसी बड़े नेता ने मान के टवीट पर खुल कर कुछ नहीं कहा है।