जस्टिस मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं हैं कि आरोपी ने पवित्र सरूप के साथ किसी प्रकार की बेअदबी (अपमान) की हो और न ही किसी प्रकार के गबन का प्रथम दृष्टया आरोप बनता है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 लापता सरूप (पवित्र स्वरूप) मामले में अहम फैसला सुनाते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व सचिव को अग्रिम जमानत दे दी है।
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अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपी के खिलाफ आपराधिक मंशा या गबन का मामला नहीं बनता बल्कि आरोप केवल लापरवाही तक सीमित हैं।
इस संबंध में दर्ज एफआईआर में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।
जस्टिस मनीषा बत्रा की एकल पीठ ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं हैं कि आरोपी ने पवित्र सरूप के साथ किसी प्रकार की बेअदबी (अपमान) की हो और न ही किसी प्रकार के गबन का प्रथम दृष्टया आरोप बनता है।
आरोप केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित प्रतीत होते हैं। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आरोपी का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड साफ है और उसने जांच में सहयोग करने की इच्छा जताई है। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर स्वयं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा दर्ज नहीं कराई गई थी जबकि वही संस्था गुरुद्वारों और धार्मिक मामलों के प्रबंधन की जिम्मेदार है। इस मामले में इससे पहले भी हाईकोर्ट अन्य आरोपियों को अंतरिम या अग्रिम जमानत दे चुका है।