पंजाब में एक ही महिला जीती हैं, वे हरसिमरत कौर बादल हैं जोकि जाट बिरादरी से हैं। जाटों में गुरजीत सिंह औजला, अमृतपाल सिंह खालसा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, मलविंदर सिंह कंग, हरसिमरत कौर बादल, मीत हेयर व सुखजिंदर सिंह शामिल हैं।
पंजाब में 13 लोकसभा सीटों के चुनाव में एक फिर से जाटों का बोलबाला सूबे की सियासत में दिखा है। पंजाब की 13 में से चार सीटें आरक्षित थीं, जिसमें चारों पर रविदासिया व रामदासिया बिरादरी ने जीत हासिल की है।
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इसके अलावा दलित बिरादरी के वाल्मीकि, भगत बिरादरी को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। एक ही महिला जीती हैं, वे हरसिमरत कौर बादल हैं जोकि जाट बिरादरी से हैं। जाटों में गुरजीत सिंह औजला, अमृतपाल सिंह खालसा, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, मलविंदर सिंह कंग, हरसिमरत कौर बादल, मीत हेयर व सुखजिंदर सिंह शामिल हैं।
वहीं, जालंधर और होशियारपुर से रविदासिया बिरादरी के दोनों उम्मीदवार बाजी मार गए हैं। इन सीटों पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलावा बाकी पार्टियों ने रविदासिया बिरादरी पर दांव खेला था। वहीं आरक्षित सीटों में डॉ. अमर सिंह के अलावा सर्बजीत सिंह खालसा रामदासिया सिख हैं। इसके अलावा फिरोजपुर से राय सिख बिरादरी के उम्मीदवार शेर सिंह घुबाया जीते हैं। राय सिंह बिरादरी का फिरोजपुर में बहुसंंख्यक वोट है। एक हिंदू उम्मीदवार डॉ. धर्मवीर गांधी भी कांग्रेस की टिकट पर पटियाला से जीते हैं।
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आरक्षित सीटों पर रविदासिया बिरादरी का ही प्रभाव
वहीं, आरक्षित सीटों पर रविदासिया बिरादरी का ही प्रभाव रहता है, क्योंकि कई सीटों पर उनकी आबादी 35 फीसदी से अधिक है। विजय सांपला हो या सोमप्रकाश, सुशील रिंकू हो या चौधरी संतोख सिंह सब नेता रविदासिया समाज से हैं।