भारतीय स्टेट बैंक मेन ब्रांच सिविल लाइन जालंधर में मुख्य प्रबंधक के तौर पर काम करने वाले जगीर चंद की वीरवार को रिटायरमेंट के दिन ही मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि उनका परिवार दलित है और एजीएम ने हमेशा इस बात को लेकर जगीर चंद को प्रताड़ित किया।
इसी कारण नौकरी खत्म होते ही उनकी मौत हो गई। परिवार वालों ने कहा कि जब तक एजीएम के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं की जाती वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। एजीएम पर मामला दर्ज कर लिया गया है।
मृतक जगीर चंद की पत्नी महिंदरा देवी निवासी समराए ने आरोप लगाया कि एजीएम एसके वर्मा उनके पति को प्रताड़ित करते थे। वीरवार को उनकी रिटायरमेंट था और बैंक में पार्टी रखी गई थी।
इस दौरान तमाम वक्ता बोल रहे थे। जैसे ही जगीर चंद बोलने लगे एजीएम वर्मा जानबूझकर उठकर चले गए इससे उनके पति को गहरा सदमा लगा जिससे उनके पति की मौत हो गई। मामले में बसपा नेता डॉ. कमदेव जंडूसिंगा भी अपने साथियों के साथ थाना चार पहुंचे और केस दर्ज करने की मांग की। मौके पर एसीपी सेंट्रल देवदत्त शर्मा भी पहुंचे।
एजीएम एसके वर्मा का कहना है कि मुख्य प्रबंधक जगीर चंद टिबरी ब्रांच गुरदासपुर में बतौर मैनेजर तैनात थे। वहां उनसे लोन के केस में काफी गलतियां हुईं। इसपर बैंक की मॉनीटरिंग शाखा ने उनपर दस लाख का जुर्माना लगाया दिया। जगीर चंद ने चंडीगढ़ जाकर खुद चार्जशीट प्राप्त की थी।
इतना ही नहीं, उन्होंने यह निवेदन किया था कि वह पांच लाख रुपये ही जुर्माना अदा कर सकते हैं। वह भी उनके पास कैश नहीं है। इसलिए यह फैसला लिया गया कि उनको मिलने वाले भत्ते से ही पैसा काट लिया जाए। इस फैसले में भी उनका कोई हाथ नहीं था।
अगर ऐसी कोई बात होती तो वीरवार को बैंक में पार्टी के दौरान जगीर चंद के परिवार सदस्यों ने उनको रात के डिनर का न्यौता क्यों दिया? दरअसल, जब जगीर चंद विदाई भाषण दे रहे थे, वह काफी नर्वस और भावुक हो गए। इसी वजह से उन्हें हार्ट अटैक आ गया।
उनकी कुछ ही समय पहले बाईपास सर्जरी हुई थी। वीरवार को भाषण के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी तो उनको बैठाकर पानी पिलाया गया और बाद में ऑक्सफोर्ड अस्पताल भेजा गया जहां उनको मृत घोषित कर दिया गया।