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ईरान-अमेरिका तनाव: पंजाब में यूरिया की किल्लत, खरीफ सीजन सिर पर; खाद की कमी से पैदावार पर खतरा

Sun, 05 Apr 2026 12:30 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर

सार

ईरान-अमेरिका तनाव के चलते गैस आपूर्ति में 30-35 प्रतिशत तक कमी आई है जिससे खाद कारखानों को मिलने वाली गैस में कटौती करनी पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल यूरिया उत्पादन में 25-30 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है।
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यूरिया लदा पिकअप पकड़ा गया - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की कृषि पर भी पड़ने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति में बाधा के कारण प्राकृतिक गैस की किल्लत पैदा हो गई है जिससे देश में यूरिया का उत्पादन प्रभावित हुआ है।

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इसका सबसे ज्यादा असर पंजाब में देखा जा रहा है जहां यूरिया की भारी कमी हो गई है। खरीफ सीजन के शुरू होने से पहले ही इस संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर जब धान और नरमा (कपास) की बुवाई के लिए यह समय बेहद अहम है।

ईरान-अमेरिका तनाव के चलते गैस आपूर्ति में 30-35 प्रतिशत तक कमी आई है जिससे खाद कारखानों को मिलने वाली गैस में कटौती करनी पड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल यूरिया उत्पादन में 25-30 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है, जिससे किसानों को इसकी आपूर्ति में भारी परेशानी हो सकती है।
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पंजाब में हर साल लगभग 30-32 लाख टन यूरिया की खपत होती है जिसमें से लगभग 70 प्रतिशत यूरिया धान की फसल में उपयोग होता है। ऐसे में सप्लाई में कमी से किसानों की उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर खाद न मिलने से धान की पैदावार में 15-20 प्रतिशत तक गिरावट हो सकती है।

कालाबाजारी का खतरा बढ़ा

पंजाब के कई जिलों जैसे बठिंडा, मानसा और संगरूर में किसान अभी से यूरिया का स्टॉक जमा करने लगे हैं जिससे बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी का खतरा बढ़ गया है। किसान नेता बलवंत सिंह का कहना है कि डीजल के बढ़ते दाम और खाद की महंगाई खेती की लागत को और बढ़ा सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बनेगा।

सरकार ने इस स्थिति को संभालने के लिए रूस और मिस्र से खाद आयात के नए समझौते किए हैं और नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिला स्तर पर निगरानी टीमें तैनात कर जमाखोरी पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए।

अगर यह गैस संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो इसका असर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्हें समय पर यूरिया मिले ताकि खरीफ फसल पर इसका बुरा असर न हो।

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