ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की कृषि पर भी पड़ने लगा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति में बाधा के कारण प्राकृतिक गैस की किल्लत पैदा हो गई है जिससे देश में यूरिया का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
पंजाब के कई जिलों जैसे बठिंडा, मानसा और संगरूर में किसान अभी से यूरिया का स्टॉक जमा करने लगे हैं जिससे बाजार में कृत्रिम कमी और कालाबाजारी का खतरा बढ़ गया है। किसान नेता बलवंत सिंह का कहना है कि डीजल के बढ़ते दाम और खाद की महंगाई खेती की लागत को और बढ़ा सकती है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बनेगा।
सरकार ने इस स्थिति को संभालने के लिए रूस और मिस्र से खाद आयात के नए समझौते किए हैं और नैनो यूरिया के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जिला स्तर पर निगरानी टीमें तैनात कर जमाखोरी पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए।
अगर यह गैस संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो इसका असर न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि उन्हें समय पर यूरिया मिले ताकि खरीफ फसल पर इसका बुरा असर न हो।