संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर। राष्ट्रीय गौरव और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए भारतीय सेना की गोल्डन एरो डिवीजन ने ऐतिहासिक फिरोजपुर किले को जनता के लिए फिर से खोल दिया है।
यह लगभग 200 साल में पहली बार है कि यह महत्वपूर्ण वास्तुशिल्प और ऐतिहासिक स्थल जनता के लिए सुलभ हुआ है, जो भारत की समृद्ध सैन्य और सांस्कृतिक विरासत के साथ स्थानीय आबादी को जोड़ने के लिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है। लोग हर रविवार सुबह नौ से 11 और शाम 5 से 7 बजे तक यहां भ्रमण कर सकेंगे।
भारत-पाकिस्तान सीमा के पास रणनीतिक रूप से स्थित, फिरोजपुर किला सिख साम्राज्य से 19वीं सदी की सैन्य वास्तुकला का उल्लेखनीय उदाहरण है। इसका अनूठा हेक्सागोनल (षटकोणीय) डिजाइन और मजबूत रक्षात्मक विशेषताएं अपने समय की रणनीतिक सरलता को दर्शाती हैं। कभी सिख राज के सीमांत रक्षा नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण चौकी रहा यह किला, साहस और प्रतिरोध की स्थायी कहानियों को समेटे हुए है। यह किला 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के कहानियाें में भी प्रमुखता से शामिल है।
फिरोजपुर का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में एक विशेष स्थान है, जिसने औपनिवेशिक शासन का बहादुरी से विरोध करने वाले कई शहीदों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया है। किले और उसके आसपास के क्षेत्रों ने महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, जो राष्ट्रीय गौरव और बलिदान का प्रतीक हैं। किले में एक जून को एक औपचारिक उद्घाटन समारोह हुआ। मौके पर मेजर जनरल आरएस मनराल, एसएम, वीएसएम, जनरल ऑफिसर कमांडिंग, गोल्डन एरो डिवीजन, साथ ही ब्रिगेडियर बिक्रम सिंह, स्टेशन कमांडर और अध्यक्ष, छावनी बोर्ड उपस्थित थे। समारोह में वरिष्ठ सिविल और सैन्य अधिकारियों, स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के स्कूलों और कॉलेजों के छात्रों ने भाग लिया। मेजर जनरल मनराल ने कहा कि यह पहल सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने और राष्ट्र की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के लिए भारतीय सेना के समर्पण के साथ पूरी तरह से मेल खाती है।