अमर उजाला ने छात्रों से की बात
राजस्थान के विशाल जो फर्स्ट ईयर के छात्र हैं, छुट्टी घोषित होने के बाद घर जाते समय अमर उजाला से बात की। उन्होंने कहा कि अभी माहौल ठीक है लेकिन 27 सितंबर को भूल नहीं पाएंगे, युवक तोड़फोड़ कर रहे थे और बिल्डिंग जला रहे थे। पहले शुरुआत में सबकुछ ठीक था छात्र खड़े हुए थे कोई तोड़फोड़ नहीं कर रहे थे। बाहर से गेट तोड़े-स्कैनिंग वाले सिस्टम तोड़कर हॉस्टल के अंदर तक घुस आए थे। बाहर क्या चल रहा था? लगातार व्हाट्सएप ग्रुप और इंस्टाग्राम से पता चल रहा था। छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, तोड़फोड़ बाहरी लोगों ने की, लेकिन लाठीचार्ज से माहौल थोड़ा बिगड़ गया था। छुट्टी और इंटरनेट बंद होने से बहुत सी चीजें ठीक हो गईं।
बिहार के रवि बोले- उस रात मुझे बाहर नहीं निकलने दिया
बिहार के रवि कुमार बीएससी फर्स्ट ईयर के छात्र हैं उन्होंने कहा कि उस रात उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया गया। उन्होंने बताया कि हमारा हॉस्टल सबसे पीछे है लेकिन जो मैसेज ग्रुप में आ रहे थे उससे पता नहीं चल रहा था कि क्या सही है और क्या गलत। अगर प्रबंधन एक दिन पहले नेट बंद कर देता तो अगले दिन आगजनी नहीं होती। बाहर से लोग अंदर घुसे थे, जिस तरह से तोड़फोड़ से आगजनी हुई किसी ने इतना नहीं सोचा था कि इस तरह से माहौल खराब होगा। छात्रों का प्रदर्शन हुआ है तो कुछ न कुछ बात तो अवश्य है लेकिन पूरी बात बाहर नहीं आई। कई हॉस्टल के छात्रों को बात अगले दिन पता चली। अभी माहौल शांत है छुट्टी के बाद घर जा रहा हूं आगे देखते हैं क्या होता है।
छात्रा सौम्या बोलीं- घटना में कोई भी छात्र यूनिवर्सिटी का नहीं था
एलपीयू की छात्रा सौम्या (बिहार) ने कहा कि 27 सितंबर को घटना हुई, मेरे हिसाब से उसमें कोई भी छात्र यूनिवर्सिटी का नहीं था। मैं प्रदर्शन में शामिल जरूर थी लेकिन जब तोड़-फोड़-आगजनी और गर्ल्स हॉस्टल तक उपद्रवी पहुंचे तो वहां से निकल गई। यूनीमॉल में चोरी और तोड़फोड़ बाहर से आए युवकों ने की। एक छात्र जिसका नाम नहीं जानती लेकिन यूनिवर्सिटी का है वह प्रदर्शन वाली जगह पर भी था। सीसीटीवी फुटेज जो सामने आई वह यूनिमॉल में तोड़फोड़ और चोरी के दौरान भी नजर आया। जो पूरी घटना हुई और जिस लड़की का नाम लेकर सबकुछ किया गया, उसके बारे में कुछ नहीं जानती। अब हालात सामान्य हैं और इंटरनेट भी बहाल कर दिया गया है।
एलपीयू की छात्रा सिंधू और विंदू ने कहा कि उस दिन हॉस्टल में छात्राओं ने प्रदर्शन करते हुए वार्डन से बात की, जब अनुमति नहीं तो सभी इकट्ठा हुए और बाहर आ गए। जिसके बाद अन्य हॉस्टल तक मैसेज सर्कुलेट हुआ तो बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठे हो गए। हम प्रदर्शन कर रहे थे क्योंकि जीएच-3 में छात्रा से दुष्कर्म की बात सामने आई थी। पता चला प्रबंधन ने लड़की को घर भेज दिया जिसके बाद माहौल बिगड़ा। तीन छात्राओं का वीडियो वायरल होने की बात पर कहा कि जो पूरा प्रकरण हुआ, जीएच-3 के उस कमरे का नहीं है जो बोला गया। 504 कमरा नंबर में ऐसा कुछ नहीं हुआ, पांचवी मंजिल पर नहीं, जो कुछ था बेसमेंट में हुआ, किसी को कुछ नहीं पता। पता नहीं 27 सितंबर की रात ऐसा क्या हुआ कि सिर्फ एक मैसेज वायरल हुआ और सब धीरे-धीरे इकट्ठे हो गए। हॉस्टल के ज्यादातर विद्यार्थी घर जा चुके हैं, इसलिए स्थिति सामान्य हो गई।