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ग्राउंड रिपोर्ट: पंजाब में फसल लहलहा रही लेकिन खेतों के नीचे सूखी धरती, कुछ जगहों पर 300 फीट नीचे पहुंचा भूजल

Tue, 06 Oct 2026 06:17 AM IST
Digvijay Singh सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर

सार

पंजाब में इस मानसून 41% कम बारिश हुई। जून से सितंबर तक 258.7 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्यतः यह 438.8 मिमी रहती है। पंजाब में इस साल धान का रकबा भी रिकॉर्ड 32.76 लाख हेक्टेयर पहुंचा है। राज्य के करीब 36 लाख हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा धान के अधीन है।
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बिन पानी सब सून - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दोपहर की तेज धूप में जालंधर के गांव गाखल के खेतों में धान की बालियां हवा के साथ झूम रही हैं। दूर तक सिर्फ हरियाली दिखाई देती है। पहली नजर में कहीं से नहीं लगता कि पंजाब इस साल कम बारिश से जूझ रहा है। खेत में खड़े 250 किले जमीन के किसान जसपाल सिंह से बात होती है तो तस्वीर बदल जाती है। वह हाथ में धान की बालियां लेकर कहते हैं-फसल तो इस बार अच्छी है, लेकिन बारिश कहां हुई? पानी तो मोटर ने दिया है।

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जसपाल की यह बात इस साल पंजाब की खेती की पूरी कहानी कह देती है। बारिश कम हुई तो किसानों ने जमीन के नीचे से पानी खींचकर फसल बचा ली। जसपाल सिंह इस बार करीब 30 क्विंटल प्रति एकड़ धान की पैदावार की उम्मीद कर रहे हैं। पिछले वर्षों में अधिक बारिश के बावजूद उन्हें करीब 16 से 22-23 क्विंटल प्रति एकड़ तक ही उपज मिली थी। इस बार खेत में पानी जमा नहीं हुआ, नमी कम रही तो बीमारी और कीटों का असर भी कम रहा।

बीमारी घटी, लेकिन उपज बढ़ी
कृषि विशेषज्ञ एवं कृषि विभाग पंजाब के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. बलदेव सिंह बताते हैं कि कम बारिश के कारण धान और कपास में बीमारियों का प्रकोप घटा। धान की औसत उपज करीब 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
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नहर पहुंची तो ट्यूबवेल कम चला
नहर का पानी पहुंचने से यहां गन्ना किसानों की ट्यूबवेल पर निर्भरता घटी है। जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती हुई है। किसान बताते हैं कि नहर का पानी समय पर मिले तो मोटर चलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

सामान्य से 41% कम बारिश
पंजाब में इस मानसून 41% कम बारिश हुई। जून से सितंबर तक 258.7 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्यतः यह 438.8 मिमी रहती है। पंजाब में इस साल धान का रकबा भी रिकॉर्ड 32.76 लाख हेक्टेयर पहुंचा है। राज्य के करीब 36 लाख हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा धान के अधीन है। दक्षिण-पश्चिमी पंजाब में भूजल की गुणवत्ता भी बिगड़ी है। पीएयू के अध्ययन में 2664 भूजल नमूनों की जांच में केवल 30.5% सिंचाई के लिए उपयुक्त मिले और 16.4% अनुपयुक्त पाए गए। 

गेहूं की बुवाई में एक सप्ताह की देरी भी प्रति एकड़ करीब डेढ़ क्विंटल तक उत्पादन घटा सकती है। इसलिए धान के बाद किसान के सामने समय पर गेहूं की बिजाई और खाद की उपलब्धता की चुनौती है।- डॉ. बलदेव सिंह, कृषि विशेषज्ञ

300 फीट नीचे पहुंच गया जलस्तर
मालवा के बठिंडा में कपास में उचित दाम न मिलने और सफेद मक्खी जैसी समस्याओं के कारण किसान धान की तरफ बढ़े तो पानी की जरूरत भी बढ़ी। किसान बताते हैं कि दादा के समय 15-20 फीट पर पानी मिल जाता था जो अब 300 फीट से नीचे चला गया है।

किन्नू के बाग में घटी चमक
मुक्तसर की किन्नू बेल्ट में कम बारिश की मार अलग नजर आती है। जून-जुलाई में नहरी पानी की कमी या जिन बागों में बारिश पर्याप्त नहीं हुई वहां किन्नू का आकार छोटा रहने और चमक घटने की बात सामने आई है।

हर जगह नहीं घट रहा भूजल स्तर 
मई 2025 में 49.56% निगरानी कुओं में पिछले दशक के औसत की तुलना में जलस्तर बढ़ा। पोस्ट-मानसून आंकड़ों में भी करीब 57% कुओं में सुधार दर्ज हुआ। 2022 से 2025 के बीच 17 ब्लॉकों में गिरते जलस्तर का रुझान पलटने की बात सामने आई है।

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