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सरकार जल्द हल करे पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का मामला, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के संचालकों ने बैठक कर परेशानियों पर की चर्चा

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जालंधर। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम के पैसे को लेकर चल रहे विवाद में अब तमाम कॉलेज संचालक सामने आ गए हैं। उनका कहना है कि सरकार इस विवाद को जल्द हल करे क्योंकि इससे कॉलेज और यूनिवर्सिटियों पर खतरा मंडरा रहा है।वीरवार को जालंधर के बड़े कॉलेज व यूनिवर्सिटी के संचालक एक मंच पर इकट्ठा हुए। उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द सरकार इस समस्या का समाधान करे। उनका पंजाब सरकार की तरफ स्कॉलरशिप का 39 करोड़ बकाया है। उनके यहां के ज्यादातर स्टूडेंट्स पास हो चुके हैं या उन्होंने 3-4 साल का कोर्स कर लिया है। इसके बावजूद अभी फीस नहीं दी है। सरकार भी पैसा नहीं भेज रही है। संयुक्त कमेटी के चेयरमैन डॉक्टर गुरमीत सिंह धालीवाल ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पंजाब के लगभग 1650 अन-एडिड कॉलेज सरकार के लिखित आदेश पर 2.5 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स को दाखिला दे रहे हैं लेकिन 3-4 सालों से कॉलेज स्कॉलरशिप की राशि के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
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काफी समय से एससी स्टूडेंट्स को मुफ्त पढ़ा रहे हैं। मजबूर होकर उन्हें विद्यार्थियों से बात करनी पड़ रही है क्योंकि छात्रवृत्ति सीधे उनके खातों में आती है। सीटी ग्रुप के चेयरमैन चरनजीत सिंह चन्नी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी जबरन उनके कैंपस में दाखिल हुए और उस पर कब्जा कर लिया। कॉलेज की महिला कर्मियों और कैंपस में रह रहे दूसरे विद्यार्र्थियों में डर का माहौल है। वाइस चांसलर अशोक मित्तल ने कहा कि पंजाब में अनुसूचित जाति के छात्र 32 प्रतिशत के करीब हैं। हमारे नौजवान उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए वजीफा स्कीमों पर निर्भर हैं। उन्होंने पंजाब सरकार से गुजारिश की कि वह इसमें तुरंत दखलअंदाजी करें। एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल ने कहा कि पंजाब में अनुसूचित जाति वर्ग की संख्या काफी अधिक है और सरकार को तत्काल इस मामले को गंभीरता से लेकर हल करना चाहिये। सरकार ने कॉलेजों व यूनिवर्सिटी को उनके बकाए अदा नहीं किए तो कॉलेज बंद हो जाएंगे।
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