टांडा उड़मुड़ (होशियारपुर )। घड़ियाल पुनर्वास प्रोजेक्ट के तहत वन विभाग की टीम ने ब्यास कंजर्वेशन रिजर्व में विलुप्त होती जा रही प्रजाति के 23 घड़ियाल छोड़े गए। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की देखरेख में एक टीम का भी गठन किया गया है। यह टीम अगले एक माह तक इन घड़ियालों का सर्वेक्षण करेगी। इसके लिए एक निगरानी स्टेशन भी बनाया गया। वन मंडल अफसर गुरशरण सिंह ने बताया कि विलुप्त होती जा रही इस प्रजाति को बचाने के लिए बनाए गए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य घड़ियालों की आबादी बढ़ाना है। प्रोजेक्ट के पहले फेज में 2017-2018 के दौरान ब्यास कंजर्वेशन रिजर्व अमृतसर और तरनतारन में 47 घड़ियाल छोड़े गए थे। वन विभाग और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की ओर से करवाए गए संयुक्त सर्वेक्षण से पता चला है कि ये घड़ियाल पूरे ब्यास दरिया में फैल गए हैं। प्रोजेक्ट के दूसरे फेस में टांडा के इस ब्यास कंजर्वेशन रिजर्व को चुना गया है। यहां पर टीम की देखरेख 23 घड़ियाल छोड़े गए हैं। इस मौके पर ब्यास दरिया रिजर्व कंजर्वेशन के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आरके मिश्रा, कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट मुनीश कुमार, फील्ड डॉयरेक्टर छत्तबीड़ चिड़ियाघर एम. सुधाकर, वन मंडल अफसर जंगली जीव गुरशरण सिंह और कोआर्डीनेटर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ गीतांजली कंवर मौजूद रहे।