फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आप के मंत्री मोहिंदर भगत को दोहरा सदमा: सुबह पिता पूर्व मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन, फिर जीजा की माैत

Thu, 10 Sep 2026 03:24 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर

सार

चुन्नी लाल भगत के निधन के साथ जालंधर की राजनीति में एक लंबे दौर का अंत हुआ है। पाकिस्तान से विस्थापन के बाद जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाकर कारोबार से सार्वजनिक जीवन और फिर विधानसभा तथा पंजाब सरकार तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए राजनीतिक संघर्ष और मेहनत की कहानी बनी रहेगी।
विज्ञापन
चुन्नी लाल भगत का देहांत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जालंधर की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं कुछ ही देर बाद उनके दामाद मोहनलाल भगत की भी माैत हो गई।
विज्ञापन


चुन्नी लाल भगत का जीवन संघर्ष, कारोबार, समाजसेवा और राजनीति के लंबे सफर की कहानी रहा। पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहां से कारोबार खड़ा करने के साथ-साथ राजनीति में भी ऐसा मुकाम हासिल किया कि प्रदेश की सत्ता में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी तक पहुंचे।

विज्ञापन


चुन्नी लाल भगत का जन्म सियालकोट में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उन्हें पाकिस्तान से भारत आना पड़ा। विस्थापन के उस दौर में नई जिंदगी शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने जालंधर में मेहनत के साथ अपना कारोबार खड़ा किया। समय के साथ खेल सामान के कारोबार में उन्होंने अपनी पहचान बनाई और शीला स्पोर्ट्स के नाम से कारोबार को स्थापित किया। कारोबारी जीवन के दौरान जालंधर के सामाजिक और व्यावसायिक वर्ग में उनका संपर्क बढ़ता गया और यही जनसंपर्क आगे चलकर उनकी राजनीतिक यात्रा की मजबूत नींव बना।

चुन्नी लाल भगत ने राजनीति में आने के बाद इसे केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने जालंधर में संगठन को मजबूत करने और लोगों के बीच अपनी पकड़ बनाने पर जोर दिया। वर्ष 1985 में उन्होंने पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा और जालंधर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। उस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने राजनीतिक मैदान नहीं छोड़ा।

इसके बाद भाजपा के साथ उनका राजनीतिक जुड़ाव मजबूत होता गया। पार्टी संगठन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने जालंधर में अपना जनाधार तैयार किया। इसका परिणाम वर्ष 1997 में सामने आया, जब उन्होंने भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया। यह उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसके बाद वर्ष 2007 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत दर्ज की और विधानसभा में अपनी स्थिति मजबूत की।
Trending Videos

2012 में जालंधर पश्चिम से जीते
विधानसभा परिसीमन के बाद जालंधर दक्षिण सीट के स्वरूप में बदलाव हुआ। वर्ष 2012 में चुन्नी लाल भगत ने जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और यहां से भी जीत दर्ज की। लगातार चुनावी सफलताओं ने उन्हें जालंधर ही नहीं, बल्कि पंजाब भाजपा के प्रमुख नेताओं की कतार में ला खड़ा किया।

उनके राजनीतिक कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2011 में उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया। इसके बाद वर्ष 2012 में भाजपा विधायक दल के नेता की जिम्मेदारी भी उन्हें मिली। यह उनके लिए पार्टी और विधानसभा के भीतर बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत था।

बादल सरकार में बने मंत्री
वर्ष 2012 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी तो चुन्नी लाल भगत को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। सरकार में उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने स्थानीय निकाय तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान जैसे विभाग संभाले। बाद में उनके पास वन एवं वन्यजीव संरक्षण तथा श्रम जैसे विभागों की जिम्मेदारी भी रही।
 

पाकिस्तान से जालंधर तक का सफर बना पहचान
चुन्नी लाल भगत की राजनीतिक कहानी को उनके जीवन के शुरुआती संघर्ष से अलग करके नहीं देखा जा सकता। पाकिस्तान के सियालकोट से विस्थापन के बाद जालंधर में नई शुरुआत करना, कारोबार को स्थापित करना और फिर सार्वजनिक जीवन में अपनी जगह बनाना उनके जीवन की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। उन्होंने कारोबार से सामाजिक संपर्क और सामाजिक संपर्क से राजनीति तक का सफर तय किया।

जालंधर में शीला स्पोर्ट्स उनके कारोबारी जीवन की महत्वपूर्ण पहचान बनी। खेल सामान के कारोबार से जुड़े होने के कारण शहर के खेल जगत और विभिन्न सामाजिक वर्गों से उनका संपर्क रहा। यही संपर्क धीरे-धीरे उनके राजनीतिक जनाधार में बदलता गया। राजनीति में आने के बाद उन्होंने जालंधर को अपना मजबूत राजनीतिक आधार बनाया और कई चुनावों में भाजपा का प्रतिनिधित्व किया।

बेटे ने भी संभाली राजनीतिक विरासत
चुन्नी लाल भगत की राजनीतिक विरासत को उनके बेटे मोहिंदर भगत ने आगे बढ़ाया। मोहिंदर भगत भी जालंधर पश्चिम की राजनीति में सक्रिय रहे। हालांकि राजनीतिक जीवन में उन्होंने बाद में अलग राह चुनी और आम आदमी पार्टी में शामिल हुए।

वर्ष 2024 के जालंधर पश्चिम विधानसभा उपचुनाव में मोहिंदर भगत ने आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें पंजाब की मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इस तरह पिता और पुत्र दोनों ने जालंधर की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, हालांकि दोनों का राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों के साथ आगे बढ़ा।
विज्ञापन

मंत्री मोहिंदर भगत को एक दिन में दो सदमे, पिता और जीजा ने एक ही दिन दम तोड़ा
पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के परिवार पर गुरुवार को दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। सुबह उनके पिता और पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वहीं, कुछ ही घंटे बाद उनके जीजा मोहनलाल भगत का भी निधन हो गया।  मोहनलाल भगत सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी थे। 

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

मोहनलाल भगत, पंजाब के कैबिनेट मंत्री मोहिंदर भगत के जीजा थे। उनके निधन की खबर से परिवार और परिचितों में शोक की लहर है। इससे पहले गुरुवार सुबह मोहिंदर भगत के पिता चुन्नी लाल भगत का जालंधर स्थित निवास पर निधन हुआ। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें