पंजाब में निर्माण कार्यों के लिए बजरी का संकट गहराने लगा है। सरकार की सख्ती से घबराकर क्रैशर मालिकों ने कामकाज बंद कर दिया है। क्रैशर मालिकों का तर्क है कि पुलिस ने पठानकोट में 132 क्रैशर मालिकों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। पंजाब में इस समय 210 क्रैशर यूनिट चल रहे हैं, जो पठानकोट और आसपास के क्षेत्रों में हैं।
मंगलवार को जालंधर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पंजाब स्टोन एंड क्रैशर एसोसिएशन के प्रधान विजय पासी, विपिन शर्मा, डॉ. संजीव सलारिया, पुष्पिंदर मैनी ने कहा कि पंजाब में क्रैशर एक इंडस्ट्री हैं। इसमें बड़े पत्थरों की प्रोसेसिंग कर उसे बजरी का रूप दिया जाता है।
विजय पासी ने बताया कि उन्हें खनन विभाग ने अपने यूनिट रजिस्टर करवाने के लिए कहा था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई है। इसके बाद सरकार ने क्रैशर यूनिटों के बिजली कनेक्शन काटने शुरू कर दिए। नतीजतन कई क्रैशर कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन करवा ली है।
पासी ने बताया कि इसके बाद अचानक खनन विभाग ने 210 क्रैशर यूनिटों को नोटिस जारी कर दिए कि वे बीते पांच माह का बिजली खर्च का ब्यौरा जमा करवाएं। उन्होंने सवाल किया कि कारोबारी पांच माह से बिजली के कितने यूनिट किस दिन फूंके गए हैं, इसका ब्यौरा कहां से दे सकते हैं।
हिमाचल और जेएडंके से मंगाते हैं पत्थर
विजय पासी ने कहा कि क्रैशर यूनिट पंजाब में खनन पर रोक के कारण वे पत्थर को हिमाचल और जम्मू-कश्मीर से मंगवाकर प्रोसेसिंग कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार उन्हें चोर की नजर से देख रही है।
उन्होंने कहा कि क्रैशर यूनिटों द्वारा बिजली का ब्यौरा नहीं दिए जाने के कारण पठानकोट में डीसी ने 132 क्रैशर यूनिटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा कि उनका कारोबार वैध है और वह बाकायदा वैध बिल पर पत्थर को दूसरे प्रदेशों से खरीद रहे हैं।