फरीदकोट केंद्रीय मॉडर्न जेल में बंद नशा तस्कर व गैंगस्टरों की तरफ से मोबाइल फोन से ही सरेआम अपना नेटवर्क चलाया जा रहा है। जेल प्रशासन हाथ पर हाथ रखकर बैठा है। हालांकि जेल प्रशासन समय-समय पर बैरकों की तलाशी लेकर मोबाइल फोन बरामद भी करता है और संबंधित हवालाती व कैदियों के खिलाफ जेल एक्ट के तहत कार्रवाई भी करवाई जाती है।
लेकिन अभी तक न तो जेल प्रशासन और न ही जिला पुलिस खुलासा कर पाई है कि आखिरकार जेल में अंदर मोबाइल फोन कैसे पहुंच रहे हैं जिनका प्रयोग नशा तस्कर व गैंगस्टर कर रहे हैं और बाहरी दुनिया से संपर्क बनाए हुए हैं।
कुछ समय पहले पंजाब पुलिस ने गुजरात एटीसी की मदद से यूएई से आई 75 किलोग्राम हेरोइन बरामद की थी। यह डील फरीदकोट जेल में बंद मालेरकोटला के नशा तस्कर कैदी बूटा सिंह ने मोबाइल फोन से करवाई थी। इस मामले के सामने आने के बाद फरीदकोट जेल एक बार फिर से विवाद में घिरती दिखाई दे रही है।
जानकारी के अनुसार जेल में नशा तस्करी के केस में सजा भुगत रहे बूटा खान ने दुबई में बैठे अपने साथी तारिक अहमद के माध्यम से 75 किलोग्राम हेरोइन की डील करवाई थी। जब गुजरात एटीसी की जांच बूटा खान तक पहुंची तो फरीदकोट जेल प्रशासन की नींद भी टूटी। जानकारी मिलने पर 12 जुलाई को जेल प्रशासन ने उच्च सुरक्षा सेल में बंद बूटा खान से मोबाइल फोन पकड़ा और पुलिस को भेजी शिकायत में दावा किया कि आरोपी ने अपना मोबाइल फोन फर्श पर फेंककर तोड़ डाला। फिलहाल आरोपी बूटा खान फरीदकोट जेल में ही बंद है।
पहले भी आ चुके हैं कई मामले
फरीदकोट जेल का यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले यहां पर मोबाइल फोन के माध्यम से नशा मंगवाने के एक नेटवर्क का भी पर्दाफाश हो चुका है। यहां पर बंद नशा तस्कर अपने बैंक खाते में भुगतान लेकर कैदियों व हवालातियों को नशा उपलब्ध करवा रहा था। इसके अलावा जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर सरेआम मोबाइल फोन का प्रयोग करते रहे हैं और कई आरोपी सोशल मीडिया पर भी लाइव होकर जेल प्रशासन को चुनौती दे चुके हैं। कुछ समय पहले ही एक हवालाती ने जेल की बैरकों की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भेज दी थी जिसके बाद पंजाब सरकार ने जेल अधीक्षक की सेवाएं निभा रहे बीएसएफ अधिकारी जोगिंदर पाल को निलंबित भी कर दिया था। उनके निलंबन के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं और जेल में से मोबाइल फोन बरामद होने का सिलसिला जारी है।