अबोहर। 1976-77 में निर्मित ‘वी’ आकार वाली नहरों को ‘यू’ आकार में बनाने के लिए अबोहर से गुजरने वाली मलूकपुरा और दौलतपुरा माइनरों को 15 दिसंबर से 14 जनवरी 2021 तक के लिए बंद किया गया है। दोनों माइनरों के पुनर्निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। वहीं नहरबंदी के करीब 15 दिनों बाद ही गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है।
करीब साढ़े 6 फुट गहरी वी आकार वाली मलूकपुरा और दौलतपुरा माइनरों की कार्यक्षमता करीब 25 वर्ष की थी। करीब 43 वर्षों से क्षेत्र की जमीन को सिंचाई पानी देने वाली यह दोनों माइनरें अब जर्जर हालत में पहुंच गईं है। विभाग ने इन्हें यू आकार में बनाने के लिए एक माह की नहरबंदी की गई है। विभाग के एक्सईएन मुख्तयार सिंह राणा ने बताया कि 13-13 किमी तक निर्माणाधीन मलूकपुरा व दौलतपुरा माइनरों पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य कंप्यूटराइज्ड मशीनों से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब नहर की गहराई साढ़े 6 फुट से घटाकर साढ़े 4 फुट रखी गई है और चौड़ाई में बढ़ोत्तरी की गई ह, जिससे नहर की सफाई करना आसान होगा। इसके साथ ही नवनिर्मित नहर की कार्यक्षमता करीब 50 वर्ष है।
एक्सईएन ने बताया कि रवी फसलों को फिलहाल पानी की जरूरत नहीं है। गांवों में पेयजल संकट के बारे में उन्होंने कहा कि नहरबंदी शुरू करने से पहले ही उन्होंने जलदाय विभाग के अधिकारियों को सूचना दी थी ताकि वे वाटर वर्क्स के जलाशयों में पानी का यथासंभव संचय कर सकें। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी के बाद नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा। चार दशक पूर्व बनी इन दोनों माइनरों के किनारे पूरी तरह से जर्जर हो चुके थे। आए दिन यह माइनर टूटने फसलों को नुकसान होता था।