शिक्षा मंत्री दलजीत सिंह चीमा जहां एक ओर यह बयान दे रहे हैं कि उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने पठानकोट का दौरा कर सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाया है।
वहीं उप मुख्यमंत्री का यह बयान कि बीएसएफ के जवानों ने अपने काम को गंभीरता से अंजाम नहीं दिया, शिक्षा मंत्री के इस बयान की धज्जियां उड़ा रहा है।
शिक्षा मंत्री सोमवार को मिठापुर में विधायक प्रगट सिंह के नेतृत्व में करवाए हॉकी टूर्नामेंट के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री ने हमले वाली जगह पर पहुंचकर सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाया, लेकिन प्रेसवार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री ने कहा था कि सुरक्षा बलों के काम में कहीं न कहीं खामी रह गई है।
उन्होंने इस हमले को लेकर पंजाब पुलिस की पीठ तो थपथपाई थी, लेकिन सुरक्षा बलों के जवानों के काम में खामियां निकाल कर चले गए थे। उधर, शिक्षा मंत्री ने पठानकोट में हुए आतंकवादी हमले को घिनौनी कार्रवाई करार दी है।
उन्होंने कहा कि सूबे के लोगों ने सीमा पार से हुए किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों को करारा जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने पठानकोट में पंजाब पुलिस की ओर से दूसरी सुरक्षा कतार बनाने की घोषणा को एक महत्वपूर्ण कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेलों से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों के पाठ्यक्रम में खेलों को अनिवार्य विषय बनाने की कवायद चल रही है।
इस बारे में विभागीय कार्रवाई प्रगति अधीन है और खेल विभाग से बातचीत कर इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से सभी 146 ब्लॉकों में खेल स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। हर ब्लॉक के लिए 1.60 करोड़ रखे गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल संस्कृति पैदा करने के साथ-साथ खिलाड़ियों को वैज्ञानिक ढंग से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से खेलों के मूलभूत ढांचे के लिए 418 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।