बहुचर्चित डिपो घोटाले में हाईकोर्ट ने खुराक सप्लाई विभाग के सचिव, डीसी जालंधर, जिला खुराक सप्लाई अधिकारी को समन कर 16 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है।
याचिका दायर करने वाले अभिषेक ने यह कहकर सीबीआई जांच की मांग की थी कि प्रदेश कांग्रेस महासचिव मनोज अरोड़ा के कई आईएएस और कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ नजदीकी संबंध हैं, जिस वजह से इंसाफ नहीं मिल रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश पर जालंधर के डिप्टी कमिश्नर को 18 मार्च 2014 को कांग्रेस नेता मनोज अरोड़ा के खिलाफ जांच के लिए कहा गया था। शिकायतकर्ता का तर्क था कि कांग्रेस नेता मनोज अरोड़ा ने मॉडल टाउन स्थित अपने खुराक सप्लाई डिपो में गरीबों के लिए आए सरकारी अनाज और तेल का गबन किया है। जून 2012 में नगर निगम ने मॉडल टाउन स्थित मनोज अरोेड़ा की बिल्डिंग का निर्माण रुकवा दिया था। इसी में सरकार की ओर से आबंटित राशन डिपो चलाया जा रहा था। वहां पर फिजिकल रूप से डिपो नहीं था, न ही लोगों को राशन और तेल दिया जा रहा था। लेकिन सरकारी रिकार्ड में डिपो चलता रहा और मनोज अरोड़ा हर माल 30 क्विंटल गेहूं व 600 लीटर मिट्टी का तेल गरीबों को बांटने के लिए सरकार से लेते रहे। यह गोेलमाल सितंबर 2013 तक लगातार चलता रहा।
इसके बाद सरकार ने प्रदेश के सभी डिपो पर गेहूं की सप्लाई बंद कर दी। डीसी जालंधर ने शिकायत मिलने के बाद डिपो मालिक मनोज अरोड़ा से डिपो और राशन कार्ड का रिकॉर्ड तलब किया। मनोज अरोड़ा ने पुलिस से शिकायत की कि उसका रेकार्ड गुम हो चुका है। उसकी पत्नी कांग्रेसी पार्षद अरुणा की तरफ से थाना डिवीजन नंबर छह से डीडीआर नंबर 21 का 18 अप्रैल 2014 को रिकॉर्ड गुम होने की शिकायत लिखवाई गई। इसके आधार पर डीसी ने अपनी जांच 15 अक्तूबर 2015 को फाइल कर दी। तर्क दिया कि रिकॉर्ड गुम हो चुका है और डिपो मालिक रिजाइन कर चुका है। साथ ही कहा कि खपतकारों की पहचान नहीं की जा सकती।
छह माह के बाद अब मॉडल टाउन में रहने वाले राशन कार्ड होल्डर अभिषेक भारद्वाज ने इसमें घोटाले होने की आशंका जताई। उन्होंने 20 मई को हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें खुराक सप्लाई विभाग के सचिव राजकमल चौधरी, डीसी जालंधर केके यादव, जिला खुराक सप्लाई अधिकारी नरिंदर सिंह को पार्टी बनाकर तर्क दिया गया कि राशन कार्ड खुराक सप्लाई विभाग जारी करता है और उनके पास पूरा रिकॉर्ड जमा होता है।