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हंगामा: जालंधर में राघव चड्ढा की मौजूदगी में आपस में भिड़े कार्यकर्ता, खूब चले थप्पड़-घूंसे

Fri, 07 Jan 2022 10:33 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

2017 के चुनावों में भी आप के नेता संजय सिंह, दुर्गेश पाठक की टीम ने पंजाब में स्थानीय लीडरशिप को दबाकर अपना कार्ड चलाया था। नतीजतन, पार्टी के नेताओं द्वारा टिकट बेचने के आरोप लगने लगे। 2017 की गलती दोबारा 2021 में दोहराई जा रही है।
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जालंधर में एक दूसरे से उलझते आप नेता। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी के प्रदेश के सह संयोजक राघव चड्ढा की मौजूदगी में जालंधर के पंजाब प्रेस क्लब में जमकर गुंडागर्दी हुई। जिन वालंटियर व नेताओं ने पिछले लंबे समय से पार्टी का ध्वज उठा रखा था, उनको दौड़ा दौड़ाकर पीटा गया। प्रेस क्लब के भीतर गमले टूट गए और वाहन भी गिरा दिए गए। 

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शाम को चार बजे राघव चड्ढा को पंजाब प्रेस क्लब में कांग्रेसी नेता दिनेश ढल्ल, अमित ढल्ल को ज्वाइन करवाना था। बठिंडा से कुछ नेता पार्टी में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। राघव चड्ढा प्रेस क्लब पहुंचते, इससे पहले ही काले झंडे लेकर आम आदमी पार्टी के वालंटियर समेत कई नेता मौके पर पहुंच गए। इसमें कई महिलाएं थीं। काले झंडे लेकर वालंटियर्स प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे थे। उनका कहना था कि आप पंजाब में पैसे बटोर रही है और टिकटों को बेचा जा रहा है। 

कई उम्रदराज नेताओं को पड़े थप्पड़

प्रदर्शनकारियों में पार्टी के प्रधान शिव दयाल माली भी थे। इस बीच राघव चड्ढा प्रेस क्लब पहुंच गए। उनके साथ कुछ समर्थक भी थे। प्रदर्शनकारी वालंटियर प्रेस क्लब के भीतर आकर राघव चड्ढा को अपनी दास्तान सुनाना चाहते थे, मगर इस बीच युवाओं की टोली ने वालंटियर्स को पीटना शुरू कर दिया। इससे वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। कई उम्रदराज नेताओं को धक्के व चांटे पड़ गए। क्लब में चीख पुकार मच गई। आरोप है कि नीचे लोग चीखते चिल्लाते रहे, ऊपर राघव चड्डा नेताओं को पार्टी में शामिल कराते रहे। जालंधर नार्थ विधानसभा हलके में आजाद तौर पर चुनाव लड़ चुके दिनेश ढल्ल आप में आ गए हैं। वह कांग्रेस में थे और नार्थ से टिकट की मांग कर रहे थे। शुक्रवार को दिनेश ने अपने भाई अमित ढल्ल और मनप्रीत सोनू समेत कई साथियों के साथ आप को ज्वाइन कर लिया। 

नेताओं में फैला रोष

पंजाब में ‘आप’ की दिल्ली की लीडरशिप के खिलाफ स्थानीय पंजाब के आप नेताओं में रोष पैदा होने लगा है। पंजाब में किसको पार्टी में ज्वाइन करवाना है, किसको टिकट देनी है, सब कुछ दिल्ली के नेता ही फाइनल कर रहे हैं। टिकटों की सूची तक भी पंजाब के नेताओं को अचानक पढ़ने के लिए मिल रही है।

2017 के चुनावों में भी आप के नेता संजय सिंह, दुर्गेश पाठक की टीम ने पंजाब में स्थानीय लीडरशिप को दबाकर अपना कार्ड चलाया था। नतीजतन, पार्टी के नेताओं द्वारा टिकट बेचने के आरोप लगने लगे। 2017 की गलती दोबारा 2021 में दोहराई जा रही है। पार्टी के प्रधान भगवंत मान से लेकर नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा तक को भी विश्वास में नहीं लिया जा रहा है। पंजाब में राघव चड्डा, संदीप पाठक, बश्विंदर अपनी टीम के साथ अलग से होमवर्क कर रहे हैं। स्थानीय नेताओं को विश्वास में लिया ही नहीं जा रहा है। लिहाजा, पार्टी में रोष पनपने लगा है।

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शुक्रवार को भी आप नेताओं ने काले झंडे लेकर दिल्ली की लीडरशिप के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि दिल्ली टीम द्वारा टिकटों को बेचा जा रहा है। राघव चड्ढा ने इस सवाल का जवाब हंसकर देते हुए कहा कि चुनावों में आवाम अपने आप इस सवाल का उत्तर दे देगी।

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