बीते कई सालों से सूबे के अस्पतालों में चल रहे नियर रिलेटिव किडनी ट्रांसप्लांट के मामले में डीआरएमई नींद से जाग गया है।
लंबे समय से चल रहे किडनी ट्रांसप्लांट के केसों पर आंखें बंद किए बैठा डीआरएमई अब आनन-फानन में तेज हो गया है।
जिन 19 किडनी ट्रांसप्लांट के अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया था, उसकी समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो जाएगी। डीआमएमई की तरफ से पंजाब के 19 अस्पतालों को 2011 से 2015 तक हुए ट्रांसप्लांट का ब्योरा मांगा था, लेकिन इन अस्पतालों को जवाब देने की दी गई समय सीमा नए साल के पहले ही दिन समाप्त हो रही है।
फिर भी इन नोटिस का जवाब देने में कम ही अस्पतालों ने दिलचस्पी दिखाई है। ज्यादातर अस्पताल इस संबंधी जवाब देने के बारे में सोच ही रहे हैं।
समय सीमा के बीच जवाब न दिए जाने के बाद की कार्रवाई पर अधिकारियों का कहना है कि अभी इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।
पंजाब में मात्र 2 अस्पतालों डीएमसी व फोर्टिस में ही नियर रिलेटिव केस की परमिशन है, बाकी के 17 अस्पताल ऐसे हैं जिनको किडनी ट्रांसप्लांट का लाइसेंस तो मिला है, लेकिन सरकार की कोई नोटिफिकेशन नहीं है।
रिसर्च एंड मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर डॉ. मनजीत कौर का मानना है कि नियर रिलेटिव केस में ट्रांसप्लांट करने वाले अस्पतालों ने सरकार से इजाजत नहीं ली है।
उनका मानना है कि जिन अस्पतालों ने ट्रांसप्लांट के दौरान सरकार की नोटिफिकेशन नहीं करवाई, वे सभी ट्रांसप्लांट गैर कानूनी समझे जा सकते हैं।
इन पर आगे क्या कार्रवाई होनी है, इसका फैसला सरकार को करना है। उनका कहना था कि उनको भी इस कानून के बारे में अभी कुछ माह पहले ही पता चला है।
उन्होंने कहा कि इन सभी अस्पतालों का पहले एक-एक साल का रिकार्ड चेक किया जा रहा है। डॉ. मनजीत कौर ने कहा कि समय सीमा शुक्रवार को समाप्त हो रही है। इसके बाद अगला प्रोसेस शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कुछ अस्पतालों की ओर से ही नोेटिस का उत्तर उनके पास आया है, जिनके नाम अभी बताना जल्दबाजी होगी।