माडर्न जेल में बुधवार को जाने देने वाले कैदी के परिजनों ने वीरवार को
सिविल अस्पताल का घेराव किया। इस दौरान कैदी नफासत हुसैन की मां नूरजहां ने
आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके 16 साल के बेटे को बाल सुधार गृह भेजने की
बजाय माडर्न जेल भेज दिया। जहां साथी कैदी उसे प्रताड़ित करने के साथ-साथ
शारीरिक शोषण करते थे। उन्हीं लोगों ने उसे आत्महत्या के लिए उकसाया है।
सिविल
अस्पताल के बाहर मृतक कैदी के परिजनों ने पंजाब गुर्जर एसोसिएशन के प्रधान
करमुद्दीन और प्रदेश सचिव मक्खन अली के नेतृत्व में आप नेता गुरशरण सिंह
कपूर के सहयोग से सुल्तानपुर लोधी रोड जाम कर दिया। वहां उन्होंने पंजाब
सरकार, जेल प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। आप नेता गुरशरण सिंह
कपूर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नफासत को पोस्टमार्टम होने तक अपनी कस्टडी
में रखा।
मृतक के चाचा मोहम्मद साजिद ने नफासत हुसैन के आधार कार्ड और
बैंक पासबुक की कापी दिखाते हुए बताया कि नफासत नाबालिग था। दस्तावेजों के
अनुसार उसका जन्म 06 अप्रैल 1998 को हुआ था। मई 2014 को पुलिस ने उसे गांव
बुद्दोपुंदर स्थित नाई की दुकान से पकड़ा और 28 मई 2014 को उसके खिलाफ थाना
सदर में केस दर्ज कर लिया गया। उस समय उन्होंने उसके जन्म प्रमाणपत्र
पुलिस को दिए थे और उसे नाबालिग बताया था, लेकिन किसी भी अधिकारी ने उनकी
बात नहीं सुनी। नफासत के भाई अबैद हुसैन ने बताया कि उसे 26 मई को सुबह
11.02 बजे जेल से फोन आया। उसमें नफासत ने उसे बताया कि जेल में उसके साथी
उसका मानसिक और शारीरिक शोषण कर रहे हैं।
एसपी जेल परमजीत सिंह संधू ने
कहा कि जेल और मेडिकल रिकार्ड के अनुसार नफासत हुसैन की आयु 19 वर्ष दर्ज
है। एसएचओ सदर हरगुरदेव सिंह ने कहा कि जब यह मामला दर्ज हुआ, तब वह एसएचओ
नहीं थे। इससे संबंधित उनके पास कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। डीएसपी
सब-डिवीजन महिंदर सिंह का कहना है कि चालान पेश करने के साथ ही सारा
रिकार्ड अदालत में भेज दिया गया।
अतिरिक्त और जिला सेशन जज एलके सिंगला
की अदालत में केस की पैरवी कर रहे एडवोकेट विजय कुमार पुरी ने कहा कि नफासत
के नाबालिग होने से संबंधित सभी दस्तावेज केस के साथ संलग्न करके अदालत
में पेश कर दिए गए थे। बावजूद इसके नफासत को बालसुधार गृह नहीं भेजा गया।
एसपी जांच जगजीत सिंह सरोआ ने कहा कि इस मामले की ज्यूडिशियल इंक्वायरी की
जा रही है। सिविल अस्पताल में सीजेएम अमित थिंद की मौजूदगी में डॉ. राजीव
पराशर, डॉ. रवजीत सिंह और डॉ. सारिका दुग्गल पर आधारित टीम ने पोस्टमार्टम
करके शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।