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किडनी चाहिए तो चले आइए पंजाब

Sat, 01 Aug 2015 10:28 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जालंध्ार
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अगर आपकी किडनी खराब है तो चुपचाप पंजाब चले आइए, यहां पर खुलेआम मानव अंगों की दुकानें सजी हुई हैं। गरीबों की किडनी निकालकर करोड़ों रुपये के वारे न्यारे करने वाले चिकित्सक व डीलर प्रति किडनी 10 से 15 लाख रुपये जेब में डाल रहे हैं और गुर्दा देने वाले को सिर्फ एक या दो लाख रुपये ही मिल रहे हैं। पहले यह कारोबार अमृतसर, जालंधर में चलता था, जो 2011 में मोहाली में शिफ्ट हो गया और अब दोबारा जालंधर में शिफ्ट हो गया है।
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अमृतसर में किडनी रैकेट का खुलासा 2002 में सबसे पहले तत्कालीन एसपी कुंवरविजय प्रताप ने किया था। इसमें अमृतसर के नामी चिकित्सक डॉ. पीके सरीन को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने कक्कड़ अस्पताल में 1922 किडनी ट्रांसप्लांट की थी। इस गोरखधंधे की आंच जालंधर पहुंची और कई नामवर चिकित्सक गिरफ्तार किए। 2003 में तत्कालीन आईजी जोनल जालंधर एसके शर्मा ने खुलासा किया था कि किडनी स्कैम का कारोबार 100 करोड़ रुपये से अधिक का हुआ है।



2011 में किडनी रैकेट का दूसरा बड़ा गोरखधंधा मोहाली में खुला, जिसमें सिल्वर ओक व सूर्या किडनी अस्पताल का नाम सामने आया। गाजियाबाद के इकरामुद्दीन पुत्र मेहरूद्दीन की किडनी निकालकर एक लाख रुपये ही उसे दिया गया था। इकरामुद्दीन की बहन रुकसाना बीमार थी, उसको पैसे की जरूरत थी। उसने यह बात शकील से की तो उसने कहा कि तुम्हारे अंदर एक नाड़ी है, जिसकी बॉडी को कोई जरूरत नहीं है। यह नाड़ी बिक सकती है। उसके फर्जी दस्तावेज तैयार कर मोहाली लाया गया और उसका आपरेशन कर एक लाख रुपये देकर वापस भेज दिया गया, जबकि उसके साथ डील दो लाख रुपये की हुई थी।
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उसका ब्लड सैंपल लेकर बदला गया और फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। चार दिन उसे सूर्या अस्पताल में दाखिल रखा गया और बाद में छुट्टी देकर घर भेज दिया गया। गांव जाकर पेट दर्द होने पर उसने चेकअप कराया तो पता चला कि गुर्दा निकाला गया है। इसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।



अब तीसरा बड़ा कांड जालंधर में दोबारा खुला है, जहां पर मोहाली की तर्ज में फर्जी दस्तावेजों के सहारे पहले किडनी बेचने वाले को खून का सगा रिश्तेदार बनाया जाता था, फिर उसका ब्लड सैंपल रास्ते में बदला जाता था ताकि डीएनए मैच कर सके, फिर उसका गुर्दा निकालकर आगे बेचा जाता था। हालात यह है कि गुर्दा 20-20 लाख रुपये में बेचकर गरीबों को 2-3 लाख रुपये दिया जाता था। कमिश्नर ऑफ पुलिस यूरिंदर हेयर का कहना है कि  जांच चल रही है, इसमें जो भी शामिल होगा, बख्शा नहीं जाएगा।
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