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अंतर द्वीपीय मानव अंग रैकेट में फगवाड़ा के मेयर का नाम उछला

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बेटी के लिए खरीदी 40 लाख की किडनी
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- मुंबई पुलिस ने फगवाड़ा के मेयर अरुण खोसला से मामले में की पूछताछ
- आंध्र प्रदेश का है किडनी प्रत्यारोपण के अवैध मामले में सक्रिया गिरोह का किंगपिन
अमर उजाला ब्यूरो
फगवाड़ा।
मानव अंग प्रत्यारोपण के अवैध कार्य में सक्रिय रैकट के तार फगवाड़ा से भी जुड़े हैं। इस मामले में भाजपाई मेयर का नाम भी सामने आया है। इसीलिए मुंबई पुलिस ने फगवाड़ा के मेयर अरुण खोसला से पूछताछ की है। पुलिस का दावा है कि रैकेट का सरगना आंध्र प्रदेश का है। उसे पुलिस ने पिछले दिनों काबू किया था। खोसला पर आरोप है कि उसने अपनी बेटी के लिए गिरोह के सरगना के जरिये 40 लाख रुपये में किडनी खरीदी और उसे मिस्र के काइरो शहर में ट्रांसप्लांट भी कराया। उधर, पुलिस अब इस मामले में विशेषज्ञों की राय ले रही है कि बगैर कानूनी प्रक्रिया के किडनी या किसी अन्य मानव अंग का सौदा करने वालों का नाम भी आरोपियों में शामिल किए जाए या नही। जाहिर है यदि किडनी की सौदेबाजी से जुड़े आरोपियों में शामिल किया गया तो खोसला की मुसीबतें भी बढ़ सकती हैं। मुंबई पुलिस ने पिछले दिनों एक रैकेट का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के किंग पिन आंध्र प्रदेश निवासी सुरेश प्रजापति व उसके एक साथी वरुचंतला निजामुद्दीन को काबू किया था। बताया जाता है कि गिरफ्तार आरोपी सोशल मीडिया के जरिये फगवाड़ा के मेयर खोसला के संर्पक में थे। उन्होंने खोसला की बेटी के लिए किडनी उपलब्ध कराने तथा मिस्र के शहर काइरो शहर के अस्पताल में ट्रांसप्लांटेशन ऑपरेशन का प्रबंध भी किया। इसके बदले में उन्होंने 40 लाख रुपये लिए। इसी संबंध में मुंबई पुलिस फगवाड़ा पहुंची तथा मेयर अरुण खोसला के बयान दर्ज किए। इसकी पुष्टि खुद अरुण खोसला ने की है, पर उन्होंने मामले में अधिक जानकारी देने से इंकार किया है। मामला उस समय खुला जब लगातार काइरो जाने वाले गिरोह के अहम सदस्य निजामुद्दीन कोमुंबई एयरपोर्ट पर काबू किया गया।
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जमानत के बाद जेल से बाहर आने पर किया मिश्र का रुख
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में निजामुद्दीन ने माना है कि वह तो महज प्रजापति के लिए काम करने वाला मोहरा है, जो मरीज की पहचान व संर्पक कर किडनी देने वालों की पहचान करता है। साथ ही उनको काइरो के अस्पताल में ले जाकर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी कराता है। किडनी देने वालों को वो पांच लाख रुपये देते हैं। सुरेश प्रजापति को पुलिस ने अहमदाबाद से काबू किया था। वह साल 2016 में श्रीलंका में किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के 58 मामलों में गिरफ्तार हुआ था। जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद भी उसने अपना अवैध काम जारी रखा, लेकिन इस बार ऑपरेशन श्रीलंका की बजाय काइरो करवाना शुरू कर दिया। यदि पुलिस मामले में खोसला को नामजद करती है तो मामले को लेकर फगवाड़ा में सियासत शुरू होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
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