दो एजीएम और एक मैनेजर का अदालत के सामने आत्मसमर्पण
बहुकरोड़ी बैंक धोखाधड़ी मामला : 10 अक्तूबर को अदालत में पेेश किया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला। करोड़ों के बैंक धोखाधड़ी के मामले में भारतीय स्टेट बैंक के दो एजीएम अदिति वालिया, विपिन नेगी और मैनेजर धर्मेंद्र तिवारी ने सोमवार को स्थानीय न्यू ज्यूडीशियल कांप्लेक्स में सीजेएम अजीतपाल सिंह की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इन लोगों ने भी दो बार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई, वहां से भी जमानत याचिका खारिज हो गई। अब इनको 10 अक्तूबर को अदालत के सामने पेश किया जाएगा। इससे पहले शुक्रवार को एसबीआई की एजीएम गरिमा परिहार ने अदालत के सामने आत्मसमर्पण किया था।
एसबीआई की एजीएम गरिमा परिहार, अदिति वालिया, विपिन नेगी और प्रबंधक धर्मेंद्र तिवारी सहित एसबीआई के अधिकारियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। यह सभी करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी में नामित हैं। सीजेएम कपूरथला ने इन आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करने के बाद इस मामले में नोटिस लेना शुरू किया था। 28 अगस्त को सुनवाई की आखिरी तारीख पर अदालत ने भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया चंडीगढ़ के तीन एजीएम विपिन नेगी, अदिति वालिया, गरिमा परिहार और एसबीआई शाखा प्रबंधक धर्मेंद्र तिवारी, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सिंह के अलावा विदेश भाग चुके मुख्य आरोपी सुखविंदर सिंह की पत्नी अमरदीप कौर, करनैल सिंह और परमजीत सिंह को पीओ करार दिया था। एकम इंपेक्स की शिकायतकर्ता सोनिया बावा ने कहा कि मुख्य आरोपी सुखविंदर सिंह को पीओ घोषित किया गया था, जो विदेश भाग गया। उन्होंने अवगत कराया कि पुलिस ने अपनी जांच में पाया है कि सभी बैंकों के दस्तावेजों पर साझेदारी के खिलाफ एक ही साझेदार के हस्ताक्षर हुए थे। मुख्य आरोपी सुखविंदर सिंह ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों के अलावा फर्म और बैंक खातों से छेड़छाड़ की। जिनकी मिलीभगत से करोड़ों की धोखाधड़ी हुई।