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आवाज देकर गांव रूकनाबेगू के बस स्टैंड पर बिकता है नशा

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फिरोजपुर। शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर गांव रूकनाबेगू के बस स्टैंड पर आवाज देकर नशा बेचा जा रहा है। हेरोइन व स्मैक की पुड़िया दो सौ रुपये से शुरू होती है। नशे में नौजवान ऐसे डूबे हैं कि घर बर्बाद हो चुके हैं। नशे के लिए पैसा नहीं मिलने पर अपने परिजनों से मारपीट करते हैं। यहां के कई घर नशे के कारण बर्बाद हो चुके हैं।
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वीरवार दोपहर करीब दो बजे गांव रूकना बेगू पहुंचे, गांव की सड़कों व गलियों में कोई भी नजर नहीं आ रहा था। सड़क किनारे लगे एक पेड़ के पास खड़े हुए। एक मकान का दरवाजा खटखटाने लगे कि पास के घर से निकल कर बलदेव सिंह नामक एक व्यक्ति बाहर आया। उससे नशे से मरने वाले काबुल सिंह के घर के बारे में पूछा तो उसने कहा कि गांव का तो बुरा हाल हो गया है। गांव के अधिकांश नौजवान नशेड़ी हैं और गांव में सरेआम नशा बिक रहा है। बलदेव ने बताया कि दस दिन पहले गांव के लोगों ने नशे के चार सौदागरों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। पुलिस उन्हें पकड़ गांव से बाहर ले गई और पचास हजार रुपये लेकर छोड़ दिया। बलदेव ने कहा कि कभी ऐसा समय था कि दोपहर में भी गांव की गलियों व सड़कों पर रौनक होती थी। नशे की लत में डूबे कई नौजवान खेतों में लेटे हैं या फिर नशा कर घरों में पड़े हैं।
गांव निवासी गंधारा सिंह ने बताया कि गांव की आबादी दो हजार है और वोट तेरह सौ हैं। गांव बस स्टैंड पर आवाज देकर नशा बेचा जाता है। कुछ महीनों में गांव में नशा ज्यादा बिकने लगा है। पहले एक हजार रुपये में हेरोइन व स्मैक की पुड़िया देते थे। अब सौ रुपये तक में नशा देना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि राजस्थान से आए रामफूल नामक व्यक्ति ने यहां पर नशे का बाजार खोल दिया है। नशा खरीदने के लिए उसके पास लोगों की लाइन लगी रहती है। आसपास के गांव के लोग भी रूकनाबेगू में नशा खरीदने पहुंचते हैं।
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...तो बच सकती थी काबुल सिंह की जान
नशे के सेवन से दो दिन पहले जान गंवाने वाले काबुल सिंह के घर में मौजूद मां गुरदीप कौर ने कहा कि उसके बेटे की नशे से मौत हो चुकी है। मैं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहूंगी कि वह अपनी पुलिस को नकेल डाले जो नशा बेचने वालों का साथ दे रही है। पुलिस और राजनीतिक नेताओं की मिलीभगत गांव रूकनाबेगु में नशा बिक रहा है। गुरदीप कौर ने कहा कि दस दिन पहले गांव के लोगों ने नशा बेचने वाले जिन चार लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था, यदि उन्हें जेल भेजा होता तो उसका बेटा काबुल की जान बच सकती थी, इन्हीं से काबुल नशा खरीद कर लाया था।
काबुल सिंह की पत्नी अमनिंदर कौर और चाची परमजीत कौर ने कहा कि गांव रूकनाबेगू में चालीस फीसदी लोग नशेड़ी हैं। गांव तूत व साइयांवाला में अस्सी फीसदी नौजवान नशेड़ी हैं। गांव में पंद्रह से सोलह साल के बच्चे नशा कर रहे हैं। काबुल की पत्नी कहती है कि मेरी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग है कि गांव से नशा खत्म करे ताकि किसी और महिला का पति व मां का बेटा न मर सके। काबुल की बेटी लवलीष कौर ने बताया वह बड़ी होकर शिक्षक बनाना चाहती है। लवलीष सातवीं कक्षा की छात्रा है।
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