संवाद न्यूज एजेंसी
जालंधर। स्मार्ट सिटी एलईडी लाइट प्रोजेक्ट में हुई गड़बड़ी को उजागर करने के लिए बुधवार को नगर निगम हाउस की बैठक रखी गई। जांच कर रही कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। कमेटी ने मेयर जगदीश राज राजा और कमिश्नर दविंदर सिंह को स्मार्ट सिटी अधिकारियों की ओर से की गई हेराफेरी के बारे में बताया। आठ सदस्यीय कमेटी ने बताया कि स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में 8 से 10 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, इसकी विजिलेंस जांच करवाई जाए।
भाजपा पार्षद सुशील शर्मा और शैली खन्ना ने कहा कि कमेटी की जांच के दौरान 30 लाख की रिकवरी जमा करवाई गई और स्टॉक रजिस्टर में जून महीने में जनवरी की इंट्री डाली गई है। स्मार्ट सिटी अधिकारियों पर करोड़ों की गड़बड़ी का आरोप लगाकर कार्रवाई करने की मांग उठी तो निगम कमिश्नर ने कहा कि रिपोर्ट ओपन हो चुकी है। शोकॉज नोटिस भेजे जाएंगे और पूछताछ भी होगी। स्मार्ट सिटी अधिकारियों को बात रखने का एक मौका मिलना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों ने मेयर को घेरते हुए कहा साढ़े चार साल तक चुप्पी साधने वाले आज तो कोई जवाब दें, जिसे मेयर ने कमिश्नर की जवाबदेही बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।
पार्षदों ने स्मार्ट सिटी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में कमेटी की रिपोर्ट आने और 3-4 बैठकों के बाद कार्रवाई के लिए मेयर ने अगली तारीख रखने को कहा तो खूब हंगामा हुआ। आनन फानन कमिश्नर ने दो दिन बाद फिर बैठक बुलाई है, जिसमें स्मार्ट सिटी के उन अधिकारियों पर कार्रवाई निश्चित करेगी जो घपले में शामिल रहे हैं।
नई लाइटें लगाने की बात कर रहे अफसर, अनुबंध में जिक्र नहीं था : कमेटी
पार्षदों ने मेयर से पूछा कि एलईडी लाइट प्रोजेक्ट के अनुबंध (एग्रीमेंट) में डार्क जोन खत्म करने और नई लाइटें लगाने की बात का कोई जिक्र नहीं है। इसके बावजूद अफसरों ने 72 हजार लाइटें लगा दीं तो फिर 44 हजार पुरानी लाइटें कहां गईं। स्ट्रीट लाइटें देखें तो कोई नहीं बता पाएगा कि कौन नई हैं कौन पुरानी। पार्षदों के तीखे सवालों के जवाब मेयर और कमिश्नर के पास नहीं थे। चुपचाप हंगामा देख रहे मेयर ने सारा ठीकरा कमिश्नर पर फोड़ते हुए उन्हें जबाव देने के लिए कहा। जब कमिश्नर दविंदर से सवाल हुए तो उन्होंने कहा कि वह पांच दिन पहले ही ट्रांसफर होकर आए हैं।
‘पानी की तरह बहा पैसा जनता का, जवाबदेही तय करें’
प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये का हेराफेरी की गई। जहां लाइटें लगानी थीं वहां नहीं लगीं। प्रोजेक्ट को पूरा करने का समय खत्म हो चुका है। पार्षदों ने कहा कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए हैं। जो जिम्मेदार हैं उनकी जवाबदेही तय करें और घोटाला करने वालों पर कार्रवाई हो। पार्षदों ने कहा निगम पुराने कर्मचारियों को ठेके पर रख लेती है जो मिलकर घोटाल करते हैं। अगर इन्हीं पदों पर युवाओं को मौका मिले तो काम भी होगा और भ्रष्टाचार भी कम हो जाएगा।