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कनाडा ने अस्थायी निवासियों पर कसी नकेल: 2027 तक गैर-स्थायी आबादी घटाएगा, पंजाब के युवाओं की बढ़ी चिंता

Sat, 05 Sep 2026 11:07 AM IST
Nivedita सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर

सार

कनाडा की 2026-2028 आव्रजन योजना में अस्थायी आबादी को टिकाऊ स्तर पर लाना प्रमुख है। पंजाब के युवाओं के लिए काम करने की अनुमति समाप्त होने की चिंता बढ़ गई है। अनुमति समाप्त होने से पहले विस्तार आवेदन पर निर्णय आने तक व्यक्ति कनाडा में रह सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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कनाडा सरकार ने अस्थायी रूप से रहने वाले लोगों की संख्या कम करने की नीति सख्त की है। इसका लक्ष्य 2027 तक कुल आबादी में गैर-स्थायी निवासियों की हिस्सेदारी पांच फीसदी से नीचे लाना है। 

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यह कदम हजारों पंजाबी युवाओं को प्रभावित करेगा जो पढ़ाई या काम की अनुमति पर कनाडा में हैं। यह निर्णय आवास और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव के कारण लिया गया है।

कनाडा की 2026-2028 आव्रजन योजना में अस्थायी आबादी को टिकाऊ स्तर पर लाना प्रमुख है। पंजाब के युवाओं के लिए काम करने की अनुमति समाप्त होने की चिंता बढ़ गई है। अनुमति समाप्त होने से पहले विस्तार आवेदन पर निर्णय आने तक व्यक्ति कनाडा में रह सकता है। हालांकि, बिना वैध आव्रजन स्थिति के रहना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। 
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पंजाब से गए युवाओं को अब केवल नौकरी हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें अपनी अनुमति की अवधि और शर्तों पर लगातार नजर रखनी होगी। लाखों लोग पढ़ाई या काम की अनुमति पर कनाडा में रह रहे हैं। नए विद्यार्थियों और कामगारों की संख्या में भी कमी आई है।

पंजाब पर नीति का प्रभाव 
कनाडा की सख्त होती व्यवस्था का असर पंजाब में दिख रहा है। अगस्त 2026 में मंत्री रवजोत सिंह ने बताया, 1,500 पंजाबी विद्यार्थी काम की अनुमति न मिलने से प्रभावित हुए। पंजाब सरकार ने यह मामला केंद्र और कनाडाई अधिकारियों के समक्ष उठाया। कई विद्यार्थियों ने ऐसे पाठ्यक्रम चुने थे जो बाद में काम की अनुमति के लिए योग्य नहीं पाए गए। कुछ विद्यार्थियों को कनाडा छोड़ना पड़ा।

आर्थिक और कानूनी चुनौतियां  
कनाडा की बदलती नीति का असर केवल वहां रह रहे युवाओं तक सीमित नहीं है। पंजाब में हजारों परिवारों ने बच्चों को कनाडा भेजने के लिए लाखों रुपये खर्च किए हैं। मंत्री रवजोत सिंह ने बताया कि कई परिवारों ने 20 लाख रुपये तक खर्च किए। काम करने की अनुमति से जुड़े फैसलों के कारण वे आर्थिक और कानूनी संकट में फंस गए हैं। एजेंटों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिन्होंने स्थायी निवास का आसान रास्ता बताया था।

काम की अनुमति की शर्तों की जांच करें
प्रवासन विशेषज्ञ पूजा सिंह के अनुसार, पंजाब के युवाओं को स्थायी निवास की रणनीति शुरुआत से ही बनानी होगी। केवल पढ़ाई या नौकरी स्थायी निवास की गारंटी नहीं है। विद्यार्थियों को दाखिला लेने से पहले पाठ्यक्रम की पात्रता और काम की अनुमति की शर्तों की जांच करनी चाहिए। आने वाले समय में स्थायी निवास की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इसलिए भाषा दक्षता और प्रासंगिक कार्य अनुभव महत्वपूर्ण होंगे। युवाओं और उनके परिवारों को एजेंटों पर निर्भर न होकर, सभी शर्तों की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए।

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