फरीदकोट के रेस्ट हाउस में जस्टिस जोरा सिंह के पास बयान दर्ज करवाने पहुंचे प्रत्यक्षदर्शी।
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बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित तमाम घटनाओं की न्यायिक जांच के लिए गठित जस्टिस जोरा सिंह आयोग की तरफ से शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी यहां के रेस्ट हाउस में सुनवाई की गई।
दूसरे दिन की सुनवाई के दौरान गांव बहिबल कलां के 17 प्रत्यक्षदर्शियों समेत करीब 37 लोगों ने आयोग के पास शपथ पत्र के रूप में अपने अपने बयान दर्ज करवाए और 14 अक्तूबर 2015 को बहिबल कलां व कोटकपूरा में सिख जत्थेबंदियों के रोष धरनों पर पुलिस जबर के बारे में जानकारी दी। दो दिनों की सुनवाई के बाद शुक्रवार शाम को जस्टिस जोरा सिंह चंडीगढ़ लौट गए।
राज्य सरकार की तरफ से गठित जस्टिस जोरा सिंह आयोग पिछले तीन माह से बरगाड़ी बेअदबी मामले से संबंधित पांच घटनाओं की जांच कर रहा है और इन घटनाओं के संदर्भ में सरकारी व गैर सरकारी लोगों से तथ्य जुटाए जा रहे हैं। एक दिन पहले वीरवार की सुनवाई के दौरान भी जिले के डिप्टी कमिश्नर मालविंदर सिंह जग्गी, एसएसपी सुखमिंदर सिंह मान समेत करीब 16 प्रत्यक्षदर्शियों ने अपने बयान दर्ज करवाए थे। शुक्रवार को काफी तादाद में प्रत्यक्षदर्शी आयोग के समक्ष पेश हुए।
इस मौके पर गांव बहिबल कलां के डॉ. गुरप्रीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को अकेले उनके गांव के ही 17 ऐसे लोगों ने आयोग को शपथ पत्र सौंपे हैं जोकि गोलीकांड की घटना के समय मौके पर मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने खुलासा किया कि घटना के समय सिख संगत शांतिपूर्वक से धरने पर बैठी हुई थी और नाम जप रही थी लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन हटाने की मंशा से पहले लाठीचार्ज किया और बाद में बिना किसी चेतावनी के गोलियां दागनी शुरू कर दीं। बहिबल गोलीकांड में दो सिख नौजवानों की मौके पर ही मौत हो गई थी।