पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की ताजपोशी से प्रदेश की राजनीति में नया बदलाव आने की आहट सुनाई देने लगी है। पठानकोट से विधायक अश्वनी शर्मा तीसरी बार प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं।
वहीं, अश्वनी शर्मा की निकटता पंजाब के पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया के साथ काफी है। लिहाजा कालिया गुट का दबदबा पंजाब भाजपा की राजनीति में दोबारा बढ़ सकता है। साल 2010 में जब प्रो. राजिंदर भंडारी के स्थान पर नए भाजपा प्रधान की खोज चल रही थी तो सबसे अधिक रेस अश्वनी शर्मा व कमल शर्मा के बीच चल रही थी। कालिया का सिक्का तब दिल्ली तक खूब चलता था। कालिया ने अश्वनी शर्मा को प्रदेश प्रधान बनाकर न केवल अश्वनी शर्मा का कद ऊंचा करवाया बल्कि पठानकोट से तत्कालीन मंत्री मास्टर मोहन लाल व होशियारपुर से तीक्षण सूद व कमल शर्मा की टीम को किनारे लगा दिया था। तब से अश्वनी शर्मा व कालिया के बीच खासा तालमेल बना हुआ है।
वहीं, संगठन महामंत्री श्रीनिवासल्लू का पूरा समर्थन अश्वनी शर्मा की टीम को मिलेगा। श्रीनिवासल्लू व जाखड़ के बीच खासी ठनी हुई थी। जाखड़ इस बात से आहत थे कि संगठन महामंत्री खासी दखलंदाजी कर रहे थे। इसलिए जाखड़ ने इस्तीफा दे दिया था। वहीं, जाखड़ के दूसरे विरोधी राणा गुरमीत सोढ़ी भी प्रदेश भाजपा में सक्रिय नजर आएंगे। जाखड़ व राणा सोढ़ी के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है।