दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के डेरा प्रबंधक कह रहे हैं कि संतों का अतीत से सरोकार नहीं होता लेकिन आशुतोष महाराज जी अपने भाई भवेंद्र झा के संपर्क में रहते थे।
वह बेशक रूटीन में अपने भाई को फोन नहीं करते थे लेकिन साल में दो-तीन बार मोबाइल से भवेंद्र झा को जरूर कॉल करते थे। भवेंद्र झा दिल्ली में रहते हैं और श्री लाल बहादुर संस्कृत विद्यापीठ के रिटायर वीसी हैं।
झा ने कहा कि आशुतोष महाराज जी ही महेश झा हैं और दलीप उनका बेटा है। भवेंद्र झा ने यह कहा कि महाराज आशुतोष जब घर छोड़कर निकल गए तो उन्होंने बाद में काफी सालों बाद खुद ही संपर्क किया था। साल में अधिक तो नहीं दो-तीन बार मोबाइल पर ही बात होती थी।
जितनी बार बात हुई, आशुतोष महाराज जी ने सिर्फ भवेंद्र झा और उनके परिवार के बारे में बातचीत की, मधुबनी में स्थित अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं जानने का प्रयास नहीं किया।
भवेंद्र झा के बेटे संजय झा ने बताया कि आशुतोष महाराज जी ने जिस मोबाइल नंबर से तीन-चार माह पहले फोन किया था, वह 29 जनवरी के बाद से ही बंद जा रहा है। उस पर कई बार कॉल की गई है लेकिन वह स्विच ऑफ चल रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि दलीप झा उनका बेटा है और उसको अपने पिता के दाह संस्कार के रीति रिवाज पूरे करने का पूरा अधिकार है।