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Jalandhar: कानून और कानूनी व्यवहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समय की जरूरत, अदालतों का बोझ होगा कम

Tue, 17 Sep 2024 08:07 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर

सार

मेहर सचदेवा पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के वकील मंदीप सचदेवा की बेटी है और पंजाब के नामचीन वकील गुरदीप सिंह सचदेवा की पोती हैं। परिवार की तीसरी पीढ़ी वकालत में है
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मेहर सचदेवा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कानून के अभ्यास को बदल सकता है। जहां एआई उपकरण वकीलों को मैन्युअल प्रक्रियाओं को स्वचालित करने और अधिक कुशलता से काम करने में मदद कर सकते हैं, वहीं अदालतों से बोझ भी कम होगा।
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कई ऐसे मामले हैं, जिनका फैसला एआई के माध्यम से किया जा सकता है। एआई की न्याय प्रकिया में आज समय की कितनी जरूरत है, इसको लेकर एडवोकेट मेहर सचदेवा कॉलेजों में वकालत की शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों को विस्तार से बताती हैं। उनका कहना है कि अब वकालत व अदालतों में काफी कुछ बदलाव की जरूरत है। हाल ही में संपन्न कार्यक्रम में मेहर ने अदालतों के कामकाज में एआई की जरूरत पर बल दिया।

मेहर का कहना है कि जैसे-जैसे एआई तकनीक विकसित होती जा रही है, कानूनी पेशेवरों को यह समझने की जरूरत है कि कानून और कानूनी अभ्यास में एआई के संभावित जोखिमों और नैतिक सवालों के साथ लाभों को कैसे संतुलित किया जाए। मेहर का कहना है कि चीन व मैक्सिको जैसे देशों में कई अदालतों में फैसले एआई के जरिये हो रहे हैं। भारत में भी मौजूदा वक्त में इसकी बहुत जरूरत है। उपभोक्ता कानून व इंश्योरेंस के भुगतान में एआई की भूमिका सकारात्मक होगी।
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भारत के विभिन्न न्यायालयों में वर्तमान में 5.5 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें अकेले सुप्रीम कोर्ट में 83,000 मामले शामिल हैं। जल्द ही, सुप्रीम कोर्ट के ज्यूडिशियल डॉक्यूमेंट्स को ट्रांसलेट करने के लेकर लीगल रिसर्च तक में एआई मदद करने वाला है। साथ ही, देश के सबसे बड़े कोर्ट के कई प्रक्रिया को इस नई टेक्नोलॉजी के जरिये आसान किया जाएगा। एआई का इस्तेमाल करके 5 अगस्त 2024 तक सुप्रीम कोर्ट के 36,271 जजमेंट को हिंदी में ट्रांसलेट करने का काम पूरा किया जा चुका है। वहीं, 17,142 जजमेंट को 16 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। हालांकि, इस ट्रांसलेशन प्रोजेक्ट के लिए कोई भी सेपरेट फंड अलोकेट नहीं किया गया है।

हाल ही में संपन्न गेस्ट लेक्चर में मेहर ने भावी वकीलों को बताया कि दशकों से अस्तित्व में है, लेकिन हाल ही में विकसित क्षमताओं ने कुछ कानूनी पेशेवरों को यह सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है कि क्या वे अपने कानूनी अभ्यासों में एआई-संचालित उपकरणों को नैतिक रूप से एकीकृत कर सकते हैं।
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