भाजपा के राष्ट्रीय प्रधान अमित शाह 21 मई को जालंधर के होटल स्काईलार्क
में दलित मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में हिस्सा लेने आएंगे। उनके साथ
भाजपा के दलित मोर्चा के 188 डेलिगेट्स और पदाधिकारी भी पहुंचेंगे। इन 188
नेताओं के ठहराव और खाने पीने की व्यवस्था को लेकर भाजपा में ठन गई है।
आयोजन को लेकर सर्किट हाउस में लगातार चल रही बैठकों में दलित नेताओं ने यह
सवाल उठाया है कि इस कार्यकारिणी का सारा खर्च दलित नेताओं पर क्यों डाला
जा रहा है। क्या भाजपा के राष्ट्रीय प्रधान अमित शाह सिर्फ दलितों के नेता
हैं। क्या इसमें अन्य भाजपा नेताओं और मंत्रियों को अपनी हिस्सेदारी नहीं
डालनी चाहिए।
20 से 22 मई तक दलित मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की
बैठक रखी गई है, जिसमें देशभर से 188 नेता आ रहे हैं। इसमें कई केंद्रीय
मंत्री, सांसद व विधायक भी शामिल हैं। उनकी सिक्योरिटी के लिए खाने-पीने का
अलग बंदोबस्त होगा। प्रदेश के सभी पदाधिकारी, विधायक, मंत्री और जिला
अध्यक्ष भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। ऐसे में यह संख्या 250 का
आंकड़ा क्रास कर जाएगी। इसको लेकर स्थानीय नेताओं की चिंता बढ़ गई है।
मेहमानों के लिए सर्किट हाउस के 11 कमरों के अलावा सीवरेज बोर्ड रेस्ट
हाउस, देवी तालाब मंदिर के 25 कमरे, होटल रमाडा, होटल रेडिसन के अलावा
जालंधर के कई बड़े होटलों के रूम बुक करवा दिए गए हैं। इनमें नेताओं का
खाना और उनके वाहन का खर्चा भी स्थानीय नेताओं कोे वहन करना होगा। दो दिन
तक लगातार चलने वाली बैठक में होटल स्काईलार्क में नेताओं के दोपहर के लंच
की व्यवस्था भी की गई है। ऐसे में बजट लाखों में पहुंच चुका है। सोमवार को
सर्किट हाउस में राष्ट्रीय सचिव तरुण चुघ ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
केंद्रीय
राज्यमंत्री विजय सांपला ने खुद इस कार्यकारिणी की बैठक को सफल करने के
लिए कमान संभाल रखी है। हाल ही में सर्किट हाउस में दलित नेताओं और
मंत्रियों की बैठक हुई, जिसमें यह तय किया गया कि दलित मंत्री व सीपीएस
कितना खर्च वहन करेंगे, जबकि भाजपा के दलित पदाधिकारी कितना पैसा इसमें
लगाएंगे। इस बीच कई दलित नेताओं ने कहा कि जब अमित शाह अमृतसर में आए थे तो
उस दौरे में तो सभी ने योगदान डाला था, दलित नेताओं ने भी कम नहीं किया
था। अब इस आयोजन की जिम्मेदारी भी बाकी मंत्रियों और सीपीएस के कंधों पर
डाली जाए।