जालंधर। शहर की खस्ता हालत और ठप हो चुके विकास कार्यों को लेकर बुधवार को कांग्रेस कमेटी ने नगर निगम के मुख्य द्वार के सामने धरना दिया। धरने से जहां कई कांग्रेसी पार्षद नदारद रहे, वहीं अनिल वशिष्ठ की जिला प्रधान अरुण वालिया से तकरार हो गई। वशिष्ठ को हरिपाल सोंधी के धरने में शामिल होने से आपत्ति थी। उनका कहना था कि सोंधी भाजपा में शरीक होकर उनको चुनाव हरवा चुके हैं, उनका इस धरने में क्या काम है। इसी पर दोनों नेताओं में बहस हो गई। इस बहसबाजी के बीच नगर निगम के विपक्ष के नेता जगदीश राजा समेत सभी पार्षद धरने से उठ निगम के पार्षद हाउस में जा बैठे।
पिछले साल हुए चुनावों में निगम पार्षद की सीट अनिल वशिष्ठ को मिली थी। इलाके के कांग्रेसी नेता हरिपाल सोंधी भाजपा में शामिल हो गए थे और उन्होंने वशिष्ठ का डटकर विरोध किया था। प्रधान अरुण वालिया ने कहा कि उन्होंने सोंधी को नहीं बुलाया है। वशिष्ठ ने कहा कि वह इस मामले को हाईकमान के पास लेकर जाएंगे। धरने में राजिन्दर बेरी, सुशील रिंकू, मेजर सिंह, हरसिमरनजीत सिंह, देसराज जस्सल, तरसेम खोसला, सुषमा गौतम, मनमोहन राजू, सुरिन्दर चौधरी, राज कुमार, वरिन्दर शर्मा, यशपाल धीमान, अमृत खोसला सहित कांग्रेस के पूर्व पार्षद और मौजूदा पार्षद शामिल हुए। वहीं कांग्रेसी पार्षद मनोज अरोड़ा, देस राज जस्सल, रीना कौर, दविंदर कौर, पलनी स्वामी, गुरविंदर बंटी, प्रदीप सिंह, बलदेव सिंह देव, गुरविंदर मिंटू, तरसेम सिंह, पवन कुमार, बलराज ठाकुर और सुरिंदर कौर समेत कई पार्षद धरने से नदारद रहे।
कांग्रेस के दोआबा से कोआर्डिनेटर वरिन्दर शर्मा ने कहा कि इस समय शहर के हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। मेयर सुनील ज्योति पूरी तरह से फेल रहे हैं। इसी कारण उनकी सहयोगी पार्टी तथा सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर चार बार उनके प्रोग्राम का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मेयर को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस समय शहर के मुकाबले गांव की हालत भी बेहतर है। इस समय भाजपा-अकाली दल में कोई तालमेल नहीं है तो शहर निवासियों से क्या तालमेल बनेगा। सोंधी विवाद पर उन्होंने कहा कि हरिपाल सोंधी कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इसलिए पार्टी के प्रदर्शन में कांग्रेस नेता के रूप में पहुंचे थे।
डायरिया से मारे गए लोगों को मिले मुआवजा
कांग्रेस प्रधान अरुण वालिया ने कहा कि गढ़ा में डायरिया फैलना निगम की नालायकी का सबूत है। इसके लिए पूरी तरह से निगम जिम्मेदार है। डायरिया में मरने वाले लोगों को निगम की तरफ से 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।