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रावण भी नहीं बच पाया महंगाई से

Wed, 11 Sep 2013 05:38 AM IST
Jalandhar
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जालंधर। महंगाई से रामलीला और दशहरे का त्योहार भी नहीं बच पाया पाया है। डालर के मुकाबले गिरते रुपये के मूल्य ने भारत में सभी वस्तुओं पर महंगाई का असर डालना शुरू कर दिया है। रामलीला कमेटियों की मानी जाए तो इस बार रामलीला पर आने वाले खर्च में करीब डेढ़ लाख रुपये की वृद्धि होगी जबकि रावण के बुत में करीब 5000 रुपये खर्च की वृद्धि होगी। रामलीला में कलाकारों की ड्रेस से लेकर साउंड, शामियाना तथा अन्य समान में गत मुकाबले भारी वृद्धि हुई है। ऐसे ही रावन बनाने के लिए पेपर तथा बांस के मूल्य में वृद्धि का असर है कि इस बार रावण महंगा होगा।
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न्यू नवयुग रामलीला कमेटी के चीफ डायरेक्टर श्रीराम जग्गी ने बताया कि रामलीला दस दिनों की होती है। इस बार रामलीला पर गत मुकाबले करीब डेढ़ लाख रुपये अधिक खर्च आने की उम्मीद है। उनका कहना है कि महंगाई के कारण लोग सेवा (रसीद कटाने) करने में भी हाथ पीछे खींचते हैं। यही नहीं रामलीला में प्रयोग आने वाला समान महंगा हो चुका है।
ऐसा ही कुछ कहना है रावण, कुंभकरण तथा मेघनाथ के पुतले बनाने वाले कारीगरों का। पुरानी जेल रोड पर रावण बनाने वाले कारीगर सरवण कुमार का कहना है कि पुतला बनाने के लिए पिछली बार बांस का मूल्य 220 रुपये (कोड़ी) (कोड़ी में 5 बांस होते हैं) मिलती थी, अब यह कोड़ी 290 रुपये हो चुकी है। ऐसे ही कागज के मूल्य में भारी वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक इन दिनों में एक कारीगर एक माह में करीब 15 मूर्तियां बना लेता है। रावन बनाने के आर्डर आगामी सोमवार से आने लगेंगे। उन्होंने बताया कि बुत में लगाने वाले पटाखे के भाव में भी रिकार्ड तोड़ वृद्धि हुई है। इसका असर इस बार साफ दिखेगा।
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