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पीड़ितों ने बंद कराया बैंक, नारेबाजी

Wed, 23 Jan 2013 05:32 AM IST
Jalandhar
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जालंधर। पंजाब एंड सिंध बैंक पठानकोट चौक की शाखा में 40 लॉकरों से करोड़ों रुपये की चोरी की घटना से पीड़ित लोगोें का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। पीड़ित महिलाएं सवेरे ही बैंक पहुंच गईं और इंसाफ न मिलता देख बैंक का कामकाज बंद करवा दिया। पीड़ितों ने बैंक के बाहर नारेबाजी भी की। इलाके के विधायक व मुख्य संसदीय सचिव केडी भंडारी समर्थकों के साथ बैंक पहुंच गए और लोगों को सहायता का आश्वासन दिया। भंडारी के पहुंचने की जानकारी मिलते ही बैंक के डायरेक्टर एसपीएस विर्क, डीजेएम एसएस कालरा बैंक पहुंच गए।
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बैंक परिसर का नजारा बड़ा दर्दनाक था। वहां पहुंची महिलाएं और पुरुष बिलख रहे थे। लोगों ने बैंक अधिकारियों को खरी खोटी सुनाई और बैंक अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही जनता का पैसा लुट गया। इसलिए उनको गिरफ्तार किया जाए। आशा रानी ने रोते हुए आरोप लगाया कि जो लोग बैंक में पैसा जमा करवाने के लिए आ रहे हैं, उनकोे कर्मचारी अंदर बैठा रहे हैं जबकि जिनका नुकसान हुआ है, उनको धक्के देकर निकाला जा रहा है। महिला रोते हुए बैंक के दरवाजे पर ही बैठ गई और चीखने चिल्लाने लगी। इससे पूरा माहौल गर्मा गया और शोर शराबा मच गया। मौके पर युवा कांग्रेसी नेता बिक्कर खैहरा व शिअद नेता परमजीत पम्मा पहुंच गए। वे लोग भी लोगों के साथ नारेबाजी करने लगे।
बाद में मामला बढ़ता देखकर परमजीत सिंह रेरू ने मुख्य संसदीय सचिव केडी भंडारी को बुला लिया। भंडारी ने बैंक पहुंचकर लोगों का दुखड़ा सुना और बाद में स्ट्रांग रूम का जायजा लिया। बैंक में उस समय मैनेजर अशोक ही मौजूद थे।
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नुकसान की सूची बोर्ड में रखेंगे
सीपीएस भंडारी ने फोन कर डीजेएम एसएस कालरा व डायरेक्टर एसपीएस विर्क को बुलाया। डीजेएम ने कहा कि इस घटना ने पंजाब एंड सिंध बैंक के पूरे तंत्र को हिलाकर रख दिया। हम पीड़ितों का दुख समझते हैं। नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। अब तक 26 लॉकर मालिक उनके पास आ चुके हैं, नौ का इंतजार किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एसपीएस विर्क ने कहा कि नुकसान की सूची पूरी बनने के बाद वह इसको आने वाली बोर्ड की मीटिंग में रखेंगे। इसके बाद मुआवजे की फाइल वित्त मंत्रालय के पास चली जाएगी, पास होने के बाद लोगों को क्लेम मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें कम से कम एक माह का वक्त लगेगा।
लिखित गारंटी देने से मना किया
जिसके बाद भी लोग शांत नहीं हुए और कहने लगे कि उनको लिखित तौर पर इसकी गारंटी चाहिए कि उनको एक माह बाद मुआवजा मिल जाएगा। लेकिन दोनों अधिकारियों ने लिखित गारंटी देने से मना कर दिया। जिसके बाद फिर से शोर शराबा मच गया। आखिरकार केडी भंडारी ने कहा कि उनके साथ मीटिंग में बैठकर जो बात हुई है, उसको एक कागज पर लिख लिया जाए। इस पर बैंक अधिकारी सहमत हो गए, जिसके बाद बैंक अधिकारियों, सीपीएस व गणमान्य लोगों ने मीटिंग की पूरी कार्यवाही को लिखा। भंडारी ने इस लिखित की कॉपी को जनता के बीच दिखाया, जिसके बाद लोग शांत हुए।
मुआवजा नहीं दिया तो देंगे धरना: भंडारी
सीपीएस केडी भंडारी ने कहा कि अगर एक माह के भीतर बैंक ने पीड़ित लोगों को मुआवजा नहीं दिया तो वह खुद धरना प्रदर्शन करेंगे और पंजाब सरकार से सिफारिश भी करेंगे कि इस मामले में बैंक अधिकारियों पर अपराधिक केस दर्ज किया जाए।
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