जालंधर। मौजूदा दौर में भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी सबसे निचले पायदान पर है। हॉकी को बुलंदियों पर ले जाने और इसके लिए पसीना बहाने वाले खिलाड़ी इस दशा से न केवल आहत हैं बल्कि हॉकी के बुरे दिनों के गवाह भी बने हुए हैं। इस खेल के दिग्गजों का मानता है कि अगर चयनकर्ता बदले की भावना न रखते तो शायद ओलंपिक में भारत का हॉकी का स्तर इतना न गिरता।
बदले की भावना ने हॉकी की कमर तोड़ी : अजीत पाल
भारतीय टीम में 1972 से 76 के दौर तक अपना नाम चमकाने वाले ओलंपियन अजीतपाल सिंह का कहना है कि बदले की भावना ने भारतीय हॉकी को गिरा दिया है। कई चमकते खिलाड़ियों ने हाल ही में वर्ल्ड हॉकी सीरीज खेली थी, जिनको ओलंपिक से रंजिशन दूर रखा गया। अब प्रभजोत, दीपक ठाकुर, राजपाल, प्रभदीप, अर्जुना हालप्पा, प्रबोध टिरकी जैसे खिलाड़ियों को ओलंपिक में नहीं खिलाया जाएगा तो यह हर्ष होना ही था। इन खिलाड़ियों का इतना ही कसूर था कि वे वर्ल्ड हॉकी सीरीज में जमकर खेले, इससे फेडरेशन हॉकी ने चयन के समय में बदले की भावना से काम लिया और वर्ल्ड हॉकी सीरीज खेलने वालों को भारतीय हॉकी टीम से दूर कर दिया गया। यहां कोच विदेश से लाए गए, अगर भारत का कोच होता तो क्या हॉकी इससे नीचे जा सकती थी, अब आखिरी पायदान से तो नीचे गिरने से रही।
चयनकर्ताओं को इस्तीफा देना चाहिए : प्रभजोत
वर्ल्ड हॉकी सीरीज में बेस्ट प्लेयर का खिताब जीतने वाले हॉकी के नामी खिलाड़ी प्रभजोत सिंह का कहना है कि रंजिशन उनको टीम में नहीं लिया गया, यह एक कड़वा सच है। मैंने वर्ल्ड हॉकी सीरीज खेली थी, इसके लिए मुझ पर गाज गिरनी तय थी। मैं भारतीय हॉकी टीम का 1998 से 2010 तक हिस्सा रहा हूं, आज हाकी का यह स्तर देखकर स्तब्ध हूं। प्रभजोत ने कहा कि मुझे तो हैरानी चयनकर्ताओं व कोच पर है। भारतीय हॉकी टीम का कोच विदेशी था। मैंने खुद उससे कोचिंग ली है, वह एक थर्ड क्लास कोच हैं। पता नहीं, उनको क्यों जिम्मेदारी दी गई थी? अब बलवीर सिंह जैसे चयनकर्ता हाकी टीम के लिए रखे गए हैं, जिनको 10 मीटर दूर तक दिखाई नहीं देता। भारतीय हाकी टीम के अच्छे खिलाड़ी
रहे और चयनकर्ता दिलीप त्रिखा ने ओलंपिक जाने वाली टीम पर अपने हस्ताक्षर कर दिए, वह भी समझ से परे है। हॉकी के चयनकर्ताओं को अब खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि वह बुरी तरह से फेल हुए हैं।
एक प्लेटफार्म पर आना होगा : गगनअजीत
भारतीय हॉकी टीम के कैप्टन रह चुके गगनअजीत सिंह का कहना है कि भारतीय हॉकी टीम को राजनीति ने मार दिया है। हॉकी के खिलाड़ी दो गुटों में बंट चुके हैं, जिन पर राजनीति हावी है। पंजाब ने देश को नामचीन हॉकी खिलाड़ी दिए हैं, इसलिए दर्द तो होता ही है। हॉकी के खिलाड़ी राजनीति का शिकार हो रहे हैं, उनका भविष्य भी अंधकारमय होता जा रहा है। अब हॉकी का नए सिरे से उत्थान करने के लिए प्रयास करने होगे। एक प्लेटफार्म पर संस्थाओं को आना होगा।
वर्ल्ड हॉकी सीरीज को सफल बनाना चाहिए था : शेरगिल
हॉकी के नामी खिलाड़ी नछत्तर सिंह शेरगिल सत्ता का कहना है कि वर्ल्ड हॉकी सीरीज एक अच्छा कदम था। उसको एक साजिश के तहत फेल किया गया, क्योंकि दूसरा गुट नहीं चाहता था कि हॉकी क्रिकेट की तरह नाम कमाए। अगर वर्ल्ड हॉकी सीरीज सफल हो जाती और उसकी लोकप्रियता बढ़ती, खिलाड़ियों को पैसा व सुविधाएं खुद ब खुद मिल जातीं। निश्चित तौर पर ओलंपिक में भारतीय टीम का तहलका होता। हॉकी को सिर्फ अहंकार की जंग ने गिरा दिया। नछत्तर सिंह से हॉकी सीख चुके कई खिलाड़ी काफी नाम कमा चुके हैं।