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एनआरआई की जमीन पर करोड़ों का लोन घोटाला

Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
Jalandhar
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जालंधर। कनाडा में रह रहे एनआरआई की 80 कनाल जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों से करोड़ों रुपये कर्ज ले लिए गए। इस मामले में फर्जी एनआरआई खड़ा कर जमीन का मुख्त्यारनामा तैयार किया गया और इसी के सहारे घोटाले को अंजाम दिया गया। इस खेल में शहर के कई नामी लोगों के अलावा बैंक अधिकारी, चार तहसीलदार समेत कई अरजी नवीस और नंबरदार भी शामिल हैं। अब तक की जांच में 48 लोगों की भागीदारी पाई गई है। एनआरआई की शिकायत के बाद पुलिस कमिश्नर गौरव यादव ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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कनाडा में रह रहे मूल रूप से गांव रेरू निवासी करतार सिंह ने बताया कि उनके पास बड़ी मात्रा में पुश्तैनी जमीन है। वह इलाका पटवारी के पास किसी कार्य से गए थे तो वहां पर एक महिला इंतकाल करवाने के लिए आ गई। पटवारी ने दस्तावेज देखे तो पैरों तले से जमीन खिसक गई क्योंकि इंतकाल के लिए जिस मुख्त्यारनामा का इस्तेमाल किया गया था, उस पर नाम व पता तो उनका था लेकिन फोटो किसी और की थी।
करतार सिंह ने एक दस्तावेज से अपने स्तर पर जांच शुरू की तो उनके होश उड़ गए। पता चला कि उनकी 1600 मरला जमीन की रजिस्ट्रियां की जा चुकी हैं। इसमें कई नंबरदारों ने झूठी गवाहियां दी हैं और तहसीलदारों ने उन रजिस्ट्रियों को तस्दीक कर दिया।
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एनआरआई करतार सिंह ने अमर उजाला के साथ बातचीत में कहा कि उनकी जमीन का इतना बड़ा फ्राड कर डाला गया और उसकी तह तक जाने में मेरी हालत खराब हो गई है। इसमें तहसीलदारों, अर्जी नवीसों ने नामी लोगों के साथ मिलकर खेल खेला है और बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया है।
ऐसे हुईं रजिस्ट्रियां
23 जनवरी 2008 को करतार सिंह पुत्र बेअंत सिंह की 82 मरला जमीन का मुख्त्यारनामा अमरजीत सिंह पुत्र हरबंस सिंह निवासी बुलंदपुर के नाम पर हुआ। इसमें करतार सिंह के स्थान पर नकली व्यक्ति खड़ा किया गया। शिनाख्त के लिए उसका नकली पैन कार्ड तैयार किया गया। इस आम मुख्त्यारनामा से आगे अमरजीत ने चार खास पावर ऑफ अटार्नी की। जिसमें उसने गुरप्रीत सिंह पुत्र रंजीत सिंह निवासी 572 प्रीत नगर को 104 मरला जमीन को तीन बार अटार्नी दी। 26 नवंबर 2011 को अमरजीत सिंह ने 25 मरला जमीन तनदीप सिंह जौली पुत्र अमरजीत सिंह जौली निवासी गुरु गोबिंद सिंह नगर को दी। खास मुख्त्यारनामा का इस्तेमाल कर 32 रजिस्ट्रियां कर दी गईं। दस्तावेजों में कई ऐसे लोगों के नाम सामने आए जिनका समाज में काफी अच्छा नाम है।
चार तहसीलदार भी शामिल
तहसील से सारी सेल डीड निकलवाई गई तो पाया गया कि रजिस्ट्रियों को तहसीलदार हरमिंदर सिंह बिट्टू, राजीव वर्मा तहसीलदार, तहसीलदार सुखबीर कौर व मनिंदर सिंह सिद्धू ने तस्दीक किया था।
कई बैंक अधिकारियों की भागीदारी
इसके अलावा कई बैकों के नाम भी सामने आए हैं, जिसमें सिटीजन को-आप्रेटिव बैंक में फर्जी रजिस्ट्री रखकर कर्ज लिया गया। इसी तरह बैंक ऑफ राजस्थान में फर्जी रजिस्ट्री रखकर कर्ज लिया गया।
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