जेल में बवाल करने के आरोपी 12 कैदी बरी
पांच साल पहले विचारधीन कैदी की मौत को लेकर उठा था विवाद
हालात काबू करने को पुलिस ने हवाई फायरिंग, लाठीचार्ज किया था
अमर उजाला ब्यूरो,
फरीदकोट। अतिरिक्त जिला व सेशन जज राजेश कुमार की अदालत ने पांच साल पहले 22 अप्रैल 2103 को केंद्रीय माडर्न जेल में विचारधीन कैदी की मौत के बाद जेल में उत्पाद मचाने के मामले में नामजद 12 कैदियों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश सुनाया। इस केस में नामजद एक कैदी की मौत हो चुकी है और एक आरोपी भगौड़ा चल रहा है। इस घटनाक्रम के दौरान कैदी पत्थराव, आगजनी व तोड़ फोड़ पर उतारू हो गए थे, जिसमें कई जेल कर्मी घायल हो गए थे और हालात पर कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, हवाई फायरिंग व आंसू गैस का सहारा लिया था।
घटना वाले दिन जेल में बंद विचारधीन कैदी मुक्तसर के गांव अरनीवाला निवासी हरसा सिंह (70) की मौत हो गई थी। इससे कुछ दिन पहले भी जेल में दो कैदियों की मौत हुई थी। इसके चलते उस दिन कैदियों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने जेल प्रशासन को मृतक कैदी के शव को उठाने नहीं दिया। जबरन शव उठाने की कोशिश करने पर कैदी जेल अधिकारियों व कर्मियों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए और रिकार्ड रूम को आग लगाते हुए कैंटीन व मेस में तोड़ फोड़ करने लगे। इस मामले में जेल प्रशासन की शिकायत पर कैदी गमदूर सिंह, जसवंत सिंह, गुरमीत सिंह कुंडा, मनजीत सिंह, सुखदेव सिंह, रेशम सिंह, अश्वनी कुमार, रछपाल सिंह पाली, इकबाल सिंह, गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह, गुरटेक सिंह, सरदूल सिंह व शाम सिंह शामा आदि को नामजद किया था।
जेल प्रशासन का आरोप था कि हरसा सिंह की मौत के लिए भी कैदी ही जिम्मेवार थे। चूंकि अचानक बीमार होने पर उसे अस्पताल ले जाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन कैदियों ने ऐसा करने से जबरन रोक दिया। केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जेल प्रशासन ने महज उन कैदियों पर केस दर्ज करवाया, जिन्होंने जेल अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की हुई थी। इस दौरान नामजद आरोपियों में से रछपाल सिंह पाली की मौत हो गई थी और शाम सिंह शामा नामक एक आरोपी भगोड़ा चल रहा है।