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कनाडा में गईं 40 हजार नौकरियां: सबसे ज्यादा पंजाब मूल के लोगों पर असर, बेरोजगारी दर 6.9 फीसदी पर पहुंची

Wed, 13 Aug 2025 07:50 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पंजाब मूल के लोग बड़ी संख्या में कनाडा में स्टडी वीजा पर हैं। लिहाजा, उन पर सबसे अधिक असर हो रहा है। ओंटारियो के कॉलेजों में स्टूडेंट वीजा पर रोक के बाद लगभग 10 हजार कॉलेज फैकल्टी और सहायक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है
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jobs - फोटो : istock
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विस्तार
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कनाडा में जुलाई में 40 हजार लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। वहां काम करने वाले लोगों की संख्या आठ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। 
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बेरोजगारी दर 6.9 फीसदी पर स्थिर रही लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इसे 7 फीसदी का आंकड़ा पार करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। सबसे अधिक असर पंजाबी मूल के लोगों पर हुआ है। जिन क्षेत्रों में अधिक नौकरियां गई हैं वह पंजाबी समुदाय का गढ़ माना जाता है।

कनाडा मामलों के माहिर सुखविंदर सिंह का कहना है कि आंकड़े अर्थव्यवस्था में मंदी का संकेत दे रहे हैं। सबसे ज्यादा नौकरियां सूचना, संस्कृति और मनोरंजन उद्योग में गईं हैं जहां 29 हजार रोजगार के अवसर खत्म हो गए। निर्माण क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। सिर्फ अल्बर्टा में ही 17 हजार नौकरियां चली गईं और प्रांत के निर्माण क्षेत्र में 20 हजार से अधिक रोजगार के अवसर खत्म हो गए। 
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नौकरियों के नुकसान का सबसे बड़ा कारण 15 से 24 वर्ष की आयु के लोगों के बीच रोजगार के स्तर में गिरावट है और 1998 के बाद पहली बार इस आयु वर्ग के केवल 53.6 प्रतिशत कर्मचारी ही काम कर रहे हैं। जुलाई में 16 लाख श्रमिकों को बेरोजगार माना गया और छात्रों में बेरोजगारी दर 17.4 प्रतिशत दर्ज की गई।

पंजाब मूल के लोग बड़ी संख्या में कनाडा में स्टडी वीजा पर हैं। लिहाजा, उन पर सबसे अधिक असर हो रहा है। ओंटारियो के कॉलेजों में स्टूडेंट वीजा पर रोक के बाद लगभग 10 हजार कॉलेज फैकल्टी और सहायक कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है या उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। 
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ओंटारियो पब्लिक सर्विस इंप्लॉइज यूनियन ने चेतावनी दी है कि कॉलेज रोजगार का पतन एक बड़े लेबर मार्केट संकट का हिस्सा है। कनाडा में ओंटारियो में टोरंटो व ब्रैंप्टन और मिसीसागा जैसे इलाके हैं, जहां पर पंजाबियों की संख्या काफी अधिक है। कनाडा के बीसी के रहने वाले प्रिंस सन्नण का कहना है कि यहां हालात बदतर हो रहे हैं। छात्रों के पास काम नहीं है। अगर काम मिला भी है तो पीआर की फाइल क्लीयर होना नामुमकिन है। पंजाब मूल के युवाओं में बेरोजगारी अधिक है।
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