प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने कनाडा में हुए संघीय चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की है। लिबरल पार्टी ने संसद में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें हासिल कर ली हैं। इस चुनाव मं पंजाबियों ने बड़ी संख्या में जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है। इस बार 22 पंजाबी उम्मीदवार कनाडा की संसद में पहुंचे हैं, जो अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। इस बार रिकॉर्ड 65 पंजाबी उम्मीदवार मैदान में थे।
बीसी से सुख धालीवाल लगातार छठी बार सांसद बने हैं। ब्रैम्पटन सेंटर से लिबरल उम्मीदवार अमनदीप सोही ने तरण चहल को हराया। लिबरल उम्मीदवार मनिंदर सिद्धू ने ब्रैम्पटन ईस्ट से कंजर्वेटिव उम्मीदवार बॉब दोसांझ को हराया। लिबरल रूबी सहोता ने ब्रैम्पटन नॉर्थ से कंजर्वेटिव अमनदीप जज को हराया। कंजर्वेटिव उम्मीदवार सुखदीप कंग ने ब्रैम्पटन साउथ से लिबरल उम्मीदवार सोनिया सिद्धू को हराया। कंजर्वेटिव उम्मीदवार अमरजीत गिल ने ब्रैम्पटन वेस्ट से मौजूदा मंत्री कमल खेड़ा को हराया।
लिबरल पार्टी के रणदीप सराय सरे से चौथी बार संसद बने हैं। ओकविले ईस्ट से अनीता आनंद, वाटरलू से बर्दिश चग्गर, डोरवाल लाचिन से अंजू ढिल्लों, मिसिसॉगा माल्टन से इकविंदर सिंह गहीर, फ्लीटवुड पोर्ट केल्स से गुरबख्श सैनी, रिचमंड ईस्ट स्टीवेस्टन से परम बैंस संसद बन गए हैं।
वहीं पंजाब मूल के कंजर्वेटिव पार्टी के विजेताओं में कैलगरी ईस्ट से जसराज हालन, कैलगरी मैक्नाइट से दलविंदर गिल, कैलगरी स्काईव्यू से अमनप्रीत गिल, ऑक्सफोर्ड से अर्पण खन्ना, एडमॉन्टन गेटवे से टिम उप्पल, मिल्टन ईस्ट से परम गिल, एबॉट्सफोर्ड साउथ लैंगली से सुखमन गिल, एडमॉन्टन साउथईस्ट से जगशरण सिंह महल और विंडसर वेस्ट से हर्ब गिल शामिल हैं।
कनाडा की दक्षिण एशियाई आबादी का एक अहम हिस्सा पंजाबी-कनाडाई समुदाय ने इस चुनाव में खास भूमिका निभाई। 2021 में 18 पंजाबी जीते थे, जबकि 2019 के संघीय चुनावों में 20 पंजाबी मूल के सांसद चुने गए थे।