सीमांत ग्रामीणों को शौचालय बनाने को नहीं मिली ग्रांट
जिले के लगभग 733 गांवों में सिर्फ तीन हजार शौचालय बने
ग्रामीणों के मुताबिक एक गांव में लगभग 300 से अधिक घर हैं
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर। केंद्र सरकार के प्रत्येक गांव के घर घर में शौचालय बनाने की स्कीम का लाभ फिरोजपुर के सीमांत गांव के ग्रामीणों को नहीं मिला है। आज भी गांव की अधिकांश ग्रामीण महिलाएं खुले में शौच करने को मजबूर हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले भर में लगभग तीन हजार शौचालय बने हैं। भारत-पाक हुसैनीवाला अंतर्राष्ट्रीय बार्डर के पास बसे कुछेक गांवों में बीएसएफ ने कई ग्रामीणों के घरों में शौचालय बनाकर दिए हैं। गांव गट्टी राजोके निवासी मंजीत कौर और राजो बाई ने कहा कि उनके गांव के पास बीएसएफ जवानों की ट्रेनिंग के लिए खुला मैदान है। वहां ग्रामीण शौच कर गंदगी फैला देते थे। इसलिए उनके गांव में लगभग बीस घरों में जिनके घर मैदान के नजदीक हैं बीएसएफ ने शौचालय बनाकर दिए हैं। उन्होंने बताया कि गांव में लगभग तीन सौ से अधिक घर हैं, सभी के घरों में शौचालय नहीं हैं। अधिकांश ग्रामीण खेतों में शौच के लिए जाते हैं।
सीमांत गांव झुग्गे हजारा सिंह वाला, कुंडे, टिंडी वाला, खुंदर गट्टी व चांदीवाला के ग्रामीणों का कहना है कि बहुत कम लोगों को शौचालय बनाने के लिए ग्रांट की एक किश्त मिली है। उसके बाद दूसरी किश्त नहीं मिली है। कई लोगों ने शौचालय की दीवारें खड़ी की है, शौचालय पूरी तरह तैयार नहीं किया गया है। शिंदो बाई और महिंदो रानी ने बताया कि उनके घरों में शौचालय बनाने के लिए ग्रांट नहीं दी गई है। आज भी उनके परिवार की महिलाएं खुले में शौच के लिए जाने को मजबूर हैं। शिंदो का कहना है कि खुले में शौच जाने के कारण ही महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं बढ़ रही है।