नोएडा के ध्यानार्थ
पंजाब के बजट में दोआबा व माझा का हाथ खाली
मालवा में गफ्फे बांटे, दोआबा की इंडस्ट्री आईसीयू में, माझा बार्डर पर
दोआबा की रबड़ इंडस्ट्री के करीब 400 यूनिट बंद, पंजाब से हिमाचल पलायन कर रहे उद्योगपति
सुरिंदर पाल
जालंधर।
शनिवार को वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने विधानसभा में बजट पेश किया तो दोआबा व माझा का हाथ खाली रखा जबकि अपने व सीएम के हल्के मालवा को जमकर गफ्फे बांटे। दोआबा की इंडस्ट्री जहां आईसीयू में है, वहीं माझा पाकिस्तान की सीमा के साथ लगता है, जहां पर एक पैकेज की मांग लंबे समय से चल रही है।
वित्तमंत्री ने बजट में चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय को दी जाने वाली ग्रांट बढ़ाकर 42.62 करोड़ कर दी गई है। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला को 50 करोड़ रुपये वन टाइम ग्रांट देने की घोषणा की गई। पटियाला में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के लिए 10 करोड़ रखा गया। हालात यह है कि जालंधर में स्पोर्ट्स कालेज की हालत बद से बदतर हो चुकी है, जहां से कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकलकर देश का डंका विदेशों में बजा चुके हैं और अब स्पोर्ट्स कॉलेज खुद पहचान का मोहताज है।
वहीं वित्तमंत्री बादल ने बायोडाइवर सिटी पार्कों का ऐलान करते हुए इनको बठिंडा, संगरूर तथा गिदड़बाहा में बनाने की घोषणा की है। तीनों क्षेत्र मालवा में है और दोआबा व माझा को भी इससे वंचित रखा है। दोआबा व माझा में काफी उद्योग हैं, जो तेजी से पलायन करते जा रहे हैं।
रबड़ इंडस्ट्री के करीब 400 यूनिट बंद
दोआबा की रबड़ इंडस्ट्री के करीब 400 यूनिट बंद हो गए हैं। जो उद्योग चल रहे हैं, वह कच्ची रबड़ केरल से मंगवा रहे हैं, जिसका खर्च अधिक है और ये इंडस्ट्री देश की बाकी इंडस्ट्री का मुकाबला काफी मुश्किल से कर रही हैं। पाइप फिटिंग इंडस्ट्री व हैंड टूल इंडस्ट्री की सांसें फूल रही हैं। 20 फीसदी स्टील महंगा हो चुका है। स्टील भी देश के दूसरे हिस्से से आता है, जिसकी ढुलाई पर ही 4 फीसदी अतिरिक्त खर्च पड़ जाता है।
माझा के बटाला में इंडस्ट्रियां तोड़ रहीं दम
माझा के बटाला में इंडस्ट्रियां भी दम तोड़ती जा रही है। पंजाब सरकार की नीतियों के कारण बटाला की इंडस्ट्री यहां से पलायन कर रही है। पड़ोसी राज्य हिमाचल में वहां की सरकार की ओर से उद्योगों को दी जा रही भारी सुविधाओं और पंजाब सरकार की बेरुखी के कारण उद्योगपतियों ने हिमाचल जाना मुनासिब समझा। सुविधाओं के नाम पर पंजाब में इंडस्ट्री को सरकारी लॉलीपॉप ही दिया जाता रहा है। बटाला हमेशा उद्योग के नाम पर मानचित्र में दिखता रहा है लेकिन खत्म हो रहे उद्योग के कारण बटाला की आर्थिकता भी कमजोर हो रही है।
एनआरआई पंजाब में निवेश से कतरा रहे
मनप्रीत बादल ने एनआरआई भाईचारे को भरोसा दिलाया कि पंजाब में उनकी तरफ से अपने गांवों में किसी भी बुनियादी ढांचे से संबंधित शुरू किए गए कामों के लिए सरकार 50 प्रतिशत का योगदान देगी। दोआबा एनआरआईज का हब है, लेकिन यह स्कीम तो लंबे समय से चल रही है। एनआरआई पंजाब में अब निवेश करने से कतरा रहे हैं और उन्होंने कई प्रोजेक्टों से हाथ खींच लिए हैं।